नई दिल्ली: 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सलेम ने दावा किया था कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के समय भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार उसकी अधिकतम 25 साल की कैद की अवधि पूरी मानी जानी चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
सलेम की ओर से दलील दी गई थी कि जेल में बिताई गई अंडरट्रायल अवधि और अच्छे आचरण के आधार पर अर्जित रिमिशन को भी उसकी 25 साल की अवधि की गणना में शामिल किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उसने तत्काल रिहाई की मांग की थी।
पुर्तगाल से प्रत्यर्पण की शर्त का दिया हवाला
अबू सलेम को 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। प्रत्यर्पण के दौरान भारत सरकार ने पुर्तगाल को एक संप्रभु आश्वासन दिया था कि सलेम को मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और उसकी कैद 25 वर्ष से अधिक नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2022 के अपने फैसले में भी माना था कि भारत सरकार इस आश्वासन का पालन करने के लिए बाध्य है। अदालत ने कहा था कि 25 वर्ष की अवधि पूरी होने पर केंद्र सरकार को उचित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उसकी सजा के संबंध में कार्रवाई करनी होगी।
अभी क्यों नहीं होगी रिहाई?
यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। अबू सलेम का कहना था कि अलग-अलग अवधियों और अर्जित रिमिशन को जोड़ने पर वह 25 साल की अवधि पूरी कर चुका है। लेकिन अदालतों ने उसकी इस गणना को स्वीकार नहीं किया।
2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में 25 साल की अवधि की गणना 12 अक्टूबर 2005 को पुर्तगाल में प्रत्यर्पण के लिए हिरासत में लिए जाने की तारीख से करने की बात कही गई थी। उस हिसाब से यह अवधि अक्टूबर 2030 में पूरी होगी।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद फिलहाल सलेम को जेल में ही रहना होगा।
1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में मिली थी उम्रकैद
अबू सलेम को 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराया गया था और 2017 में विशेष TADA अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसे एक अन्य हत्या मामले में भी 2015 में उम्रकैद की सजा मिली थी।
12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। अबू सलेम को मामले में साजिश और हथियार पहुंचाने से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया गया था।
विस्तृत आदेश पर रहेगी नजर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार सलेम की तत्काल रिहाई की मांग खारिज कर दी गई है। फैसले के विस्तृत आदेश से यह और स्पष्ट होगा कि अदालत ने रिमिशन और 25 साल की अवधि की गणना पर क्या विस्तृत कानूनी आधार दिया है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि अबू सलेम को तत्काल या समय से पहले रिहाई की राहत नहीं मिली है।







