धनबाद: जोगता थाना क्षेत्र के सिजुआ 10 नंबर में मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को हुए भीषण भू-धसान के बाद लोगों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। हादसे में कई घर जमींदोज हो गए थे। इस घटना में 12 वर्षीय किशोर विक्रम की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने करीब 14 घंटे तक सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद मृतक विक्रम का शव लेकर परिजन और स्थानीय नेता BCCL एरिया-5 के क्षेत्रीय कार्यालय के सामने पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर करीब 12 घंटे से शव के साथ धरना जारी है।
बेटे की मौत से सदमे में परिवार
सिजुआ 10 नंबर में हुए भू-धसान ने एक परिवार का 12 वर्षीय चिराग छीन लिया। हादसे के बाद से ही स्थानीय लोगों में BCCL प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी बनी हुई है।
पोस्टमार्टम के बाद विक्रम का शव BCCL एरिया-5 कार्यालय के सामने लाकर परिजनों ने धरना शुरू कर दिया। परिजनों की मांग है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और भू-धसान से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।
मृतक के पिता भीम बहादुर उर्फ गुड्डू ने कहा कि बेटे की मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में है। उन्होंने प्रबंधन से उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही घटना को लेकर BCCL एरिया-5 प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।
BCCL पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप
कांग्रेस नेता अशोक प्रकाश लाल ने BCCL प्रबंधन पर मुआवजे को लेकर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में एक जैसी घटनाओं के लिए अलग-अलग मुआवजा नीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने के साथ प्रभावित परिवारों के नियोजन और JAREDА के तहत सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की। अखिल भारतीय भुइयां समाज कल्याण समिति के जिला महामंत्री मनोज कुमार ने भी पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।
मनोज कुमार के अनुसार, BCCL के अन्य क्षेत्रों में इसी तरह की घटनाओं में 10 लाख रुपये तक मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में उनका कहना है कि सिजुआ के पीड़ित परिवार को भी उसी प्रावधान के तहत मुआवजा मिलना चाहिए।
कथित अवैध माइनिंग पर भी उठे सवाल
धरना दे रहे लोगों ने इलाके में लंबे समय से कथित तौर पर चल रही अवैध माइनिंग को भी हादसे की वजह बताया है। प्रदर्शनकारियों ने इसके लिए BCCL प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, अवैध माइनिंग से भू-धसान होने के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुआवजे को लेकर मंगलवार को BCCL प्रबंधन और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक प्रबंधन की ओर से धरनास्थल पर बातचीत के लिए कोई अधिकारी सामने नहीं आया है।
फिलहाल मृतक किशोर विक्रम का शव BCCL एरिया-5 कार्यालय के सामने रखा हुआ है और परिजन व स्थानीय नेता धरने पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और भू-धसान से प्रभावित सभी परिवारों का सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास कराया जाए।







