पटना: राजधानी पटना में गंगा समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा गंभीर हो गया है। गंगा का पानी लगातार बढ़ रहा है और इसका असर शहर के निचले इलाकों से लेकर दियारा क्षेत्रों तक दिखाई दे रहा है। कई घरों में पानी घुस चुका है, जबकि बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों की ओर जा रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए पटना की सुरक्षा दीवार से जुड़े सभी 108 रास्तों को बंद कर दिया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि नालों के रास्ते गंगा का पानी शहर में प्रवेश न कर सके। डीएम कुंदन कुमार ने दीघा घाट, बिंद टोली, एलसीटी घाट और गोसाईं टोला समेत कई संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण किया।
13 स्लूइस गेट के सीपेज सील
निरीक्षण के दौरान सुरक्षा दीवार और स्लूइस गेट से पानी के रिसाव की जानकारी मिलने के बाद 13 स्लूइस गेट के सीपेज को सील कराया गया है। सभी स्लूइस गेट, नालों, तटबंधों और पंपिंग स्टेशनों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
मनेर का इस्लामगंज गांव गंगा और सोन के पानी से घिरकर टापू बन गया है। वहीं दानापुर दियारा की छह पंचायतें जलमग्न हैं। कई परिवार मवेशियों के साथ राहत शिविरों में पहुंच रहे हैं।
दरधा नदी का तटबंध टूटा
धनरूआ प्रखंड में दरधा नदी का तटबंध करीब 20 से 25 फीट तक टूटने से लगभग 30 घरों में पानी घुस गया। कई गांवों की धान और मकई की फसलें भी डूब गई हैं।
मोकामा दियारा के पांच गांवों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। जंजीरा दियारा से 150 से अधिक लोग मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे हैं।
66 नावें और SDRF तैनात
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित दियारा क्षेत्रों में लोगों को निकालने के लिए 66 नावें चलाई हैं। सामुदायिक रसोई, राहत शिविर और पशु शिविर भी शुरू किए गए हैं। उमानाथ, गांधी घाट, दीघा घाट और जेपी सेतु समेत कई घाटों पर मोटरबोट के साथ SDRF की टीम तैनात की गई है।
इधर पुनपुन नदी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। प्रशासन का कहना है कि गंगा के बढ़ने की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। अगले कुछ घंटे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।







