बॉलीवुड में फैमिली ड्रामा और कॉमेडी फिल्मों की हमेशा अपनी अलग जगह रही है। इसी कड़ी में आई फिल्म ‘दादी की शादी’ रिश्तों, परिवार, दूसरी पारी और समाज की सोच को हल्के-फुल्के लेकिन भावनात्मक अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी भावनात्मक कहानी और पारिवारिक माहौल है, जो दर्शकों को कई जगह हंसाता भी है और भावुक भी करता है। हालांकि फिल्म की लंबाई और धीमा स्क्रीनप्ले कुछ जगह इसकी रफ्तार को कमजोर कर देता है।
कहानी: उम्र नहीं, खुशियां मायने रखती हैं
फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जहां घर की बुजुर्ग महिला यानी दादी (नीतू कपूर) अचानक अपनी दूसरी शादी का फैसला लेकर पूरे परिवार को चौंका देती हैं।
परिवार के लोग इस फैसले को स्वीकार नहीं कर पाते। बच्चों को समाज की चिंता सताने लगती है, रिश्तेदार ताने मारते हैं और घर में बहस शुरू हो जाती है। लेकिन दादी अपनी जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं।
यहीं से फिल्म में कॉमेडी, इमोशन और फैमिली ड्रामे की शुरुआत होती है।
कहानी केवल शादी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह अकेलेपन, उम्र के बाद की जिंदगी, परिवार में महिलाओं की भूमिका और समाज की मानसिकता जैसे मुद्दों को भी छूती है।
नीतू कपूर ने फिल्म को संभाला
Neetu Kapoor इस फिल्म की जान हैं। उन्होंने दादी के किरदार को बेहद आत्मीयता और सहजता के साथ निभाया है।
उनकी स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को मजबूत बनाती है। कई भावुक दृश्यों में उनका अभिनय सीधे दिल को छूता है, जबकि कॉमिक सीन में भी उनकी टाइमिंग शानदार है।
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष यही है कि नीतू कपूर अपने किरदार को ओवरड्रामेटिक नहीं होने देतीं। उनका अभिनय सादगी और आत्मविश्वास से भरा हुआ लगता है।
कपिल शर्मा की कॉमिक टाइमिंग बनी ताकत
Kapil Sharma फिल्म में राहत और मनोरंजन का बड़ा जरिया बनकर सामने आते हैं।
उन्होंने अपने किरदार को पूरी ऊर्जा के साथ निभाया है। परिवार के अंदर होने वाली बहस, गलतफहमियां और शादी की तैयारियों के बीच उनके कई डायलॉग और सिचुएशन दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं।
हालांकि कुछ जगह ऐसा महसूस होता है कि कपिल शर्मा को और ज्यादा स्पेस दिया जा सकता था।
सपोर्टिंग कास्ट ने भी निभाई अहम भूमिका
R. Sarathkumar का अभिनय संतुलित और प्रभावशाली है। उन्होंने गंभीरता और भावनात्मक गहराई वाले दृश्यों में अच्छा काम किया है।
वहीं Sadia Khateeb और Riddhima Kapoor Sahni ने मॉडर्न फैमिली की सोच और पीढ़ियों के टकराव को अच्छे तरीके से दिखाया है।
Yograj Singh अपने सीमित स्क्रीन टाइम में प्रभाव छोड़ते हैं।
निर्देशन: अच्छा विषय, लेकिन लंबी हो गई फिल्म
निर्देशक Ashish R Mohan ने फिल्म को एक साफ-सुथरी फैमिली एंटरटेनर बनाने की कोशिश की है।
फिल्म का विषय नया और दिलचस्प है, क्योंकि भारतीय सिनेमा में बुजुर्गों की दूसरी शादी को बहुत कम दिखाया गया है।
निर्देशक ने इमोशन और कॉमेडी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है, लेकिन फिल्म का रन टाइम 2 घंटे 35 मिनट होने की वजह से कई जगह कहानी खिंची हुई महसूस होती है।
दूसरे हाफ में कुछ सीन दोहराव वाले लगते हैं और एडिटिंग थोड़ी बेहतर हो सकती थी।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत कहानी के मूड के मुताबिक रखा गया है। कुछ गाने पारिवारिक माहौल को खूबसूरती से दिखाते हैं, जबकि बैकग्राउंड स्कोर भावुक दृश्यों को मजबूत बनाता है।
सिनेमैटोग्राफी रंगीन और आकर्षक है। शादी वाले सीन्स को काफी भव्य तरीके से फिल्माया गया है।
कॉस्ट्यूम और सेट डिजाइन भी फिल्म के पारिवारिक माहौल को वास्तविक बनाने में मदद करते हैं।
फिल्म का सोशल मैसेज
‘दादी की शादी’ केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि समाज की सोच पर भी सवाल उठाती है।
फिल्म यह संदेश देने की कोशिश करती है कि खुश रहने और अपनी जिंदगी जीने का अधिकार हर उम्र में होना चाहिए।
समाज अक्सर बुजुर्गों की भावनाओं को नजरअंदाज कर देता है, लेकिन फिल्म इस सोच को बदलने की बात करती है।
क्या अच्छा लगा?
- नीतू कपूर का शानदार अभिनय
- कपिल शर्मा की कॉमिक टाइमिंग
- फैमिली ऑडियंस के लिए साफ-सुथरी कहानी
- इमोशन और कॉमेडी का अच्छा मिश्रण
- सामाजिक संदेश
क्या कमजोर लगा?
- फिल्म की लंबाई ज्यादा
- दूसरा हाफ थोड़ा धीमा
- कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक
- क्लाइमैक्स अनुमानित लगता है
देखें या नहीं?
अगर आप फैमिली ड्रामा, इमोशनल कहानियां और हल्की-फुल्की कॉमेडी पसंद करते हैं, तो ‘दादी की शादी’ आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
यह फिल्म बड़े पैमाने पर मनोरंजन नहीं करती, लेकिन परिवार के साथ बैठकर देखने लायक साफ-सुथरी और भावनात्मक कहानी जरूर पेश करती है।
अंतिम फैसला
‘दादी की शादी’ एक ऐसी फिल्म है जो हंसाने के साथ-साथ रिश्तों और जिंदगी को लेकर सोचने पर भी मजबूर करती है।
नीतू कपूर का दमदार अभिनय, कपिल शर्मा की कॉमेडी और पारिवारिक भावनाओं से भरी कहानी फिल्म को खास बनाती है। हालांकि इसकी लंबाई और धीमा स्क्रीनप्ले इसे पूरी तरह प्रभावशाली बनने से रोक देता है।
अगर आप मसाला एंटरटेनमेंट से हटकर इमोशनल फैमिली फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।







