चुनरी और भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट कर किया सम्मानित, जदयू कार्यालय में दिखा उत्साह का माहौल
पटना:
बिहार मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच मंत्री बनने के बाद पहली बार श्री निशांत कुमार जदयू प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका गर्मजोशी के साथ भव्य स्वागत किया। जदयू कार्यालय में सुबह से ही कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी रही और पूरा परिसर नारों एवं तालियों से गूंजता रहा।
निशांत कुमार के कार्यालय पहुंचते ही समर्थकों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। “जदयू जिंदाबाद” और “निशांत कुमार जिंदाबाद” के नारों के बीच कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पहली बार पार्टी कार्यालय पहुंचने पर कार्यकर्ताओं में खासा जोश और खुशी दिखाई दी।
इस दौरान नागरिक परिषद के महासचिव अरविंद कुमार एवं छोटू सिंह ने निशांत कुमार को मां जय माता दी मंदिर, गोलघर की पवित्र चुनरी एवं भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। दोनों नेताओं ने उन्हें मंत्री बनने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि निशांत कुमार के नेतृत्व में बिहार विकास और जनसेवा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी जाहिर की। कई समर्थकों ने इसे जदयू संगठन के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है।
अपने संबोधन में निशांत कुमार ने सभी कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी और जनता ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास, संगठन की मजबूती और आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्य किया जाएगा।
निशांत कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को और मजबूत करने तथा सरकार की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार बिहार कैबिनेट विस्तार के बाद जदयू कार्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती, कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने और पार्टी के जनाधार को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।







