Friday, July 17, 2026
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21 जून की NEET परीक्षा के लिए मेगा प्लान! सेना, एयरफोर्स और PM मोदी खुद रखेंगे नजर

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NEET-UG री-एग्जाम को लेकर केंद्र सरकार इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं चाहती। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद 21 जून को होने वाली परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई के लिए भारतीय वायुसेना की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार “Whole of Government Approach” के तहत कई मंत्रालयों और एजेंसियों को इस प्रक्रिया से जोड़ रही है। इसमें शिक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां, राज्य पुलिस, डाक विभाग और जरूरत पड़ने पर भारतीय वायुसेना की भूमिका शामिल हो सकती है। इसका मकसद परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाना है।

एयरफोर्स के जरिए पेपर पहुंचाने की तैयारी

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि NEET-UG री-एग्जाम के प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से अलग-अलग राज्यों और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों का इस्तेमाल किया जा सकता है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कहा है कि जून महीने में मौसम और लॉजिस्टिक चुनौतियों को देखते हुए प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एयरफोर्स की मदद ली जाएगी।

हाई लेवल मीटिंग में बनी रणनीति

इस पूरी तैयारी को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल रहे। इसमें प्रश्नपत्रों की छपाई, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।

PM मोदी तक पहुंच रही हर अपडेट

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी NEET री-एग्जाम की तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अहम जानकारियां उन्हें लगातार दी जा रही हैं। हालांकि इस पर आधिकारिक बयान की भाषा में सावधानी जरूरी है, क्योंकि कई बातें सूत्रों के हवाले से सामने आई हैं।

सुरक्षित स्टोरेज पर भी जोर

इस बार सिर्फ पेपर ट्रांसपोर्टेशन ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्रों के सुरक्षित स्टोरेज पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार पारंपरिक बैंक लॉकरों के अलावा अन्य सुरक्षित स्थानों की पहचान करने पर भी विचार कर रही है, ताकि परीक्षा सामग्री को किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचाया जा सके।

NTA ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

NEET पेपर लीक विवाद के बीच NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 21 जून की री-एग्जाम के लिए सुरक्षा और निगरानी से जुड़े कई सुधार लागू किए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि पिछली गड़बड़ियों जैसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए परीक्षा प्रणाली को मजबूत किया गया है।

छात्रों और अभिभावकों की नजर परीक्षा पर

NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। इस परीक्षा से लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है। पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी और चिंता दोनों देखी गई। ऐसे में 21 जून की परीक्षा सरकार और NTA के लिए भरोसा वापस जीतने की बड़ी चुनौती बन गई है।

परीक्षा केंद्रों पर भी होगी सख्ती

सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा केंद्रों पर एंट्री से लेकर सीटिंग अरेंजमेंट तक हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है। उम्मीदवारों की पहचान, एडमिट कार्ड जांच, CCTV मॉनिटरिंग, जैमर, पुलिस बल और फ्लाइंग स्क्वॉड जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा सकता है। परीक्षा केंद्रों पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए जाएंगे।

गर्मी को देखते हुए विशेष इंतजाम

21 जून को परीक्षा होने के कारण कई राज्यों में गर्मी और उमस की स्थिति रह सकती है। इसी को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर पीने के पानी, पंखे, बिजली, मेडिकल सहायता और छायादार प्रतीक्षालय जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।

क्यों इतना बड़ा सुरक्षा प्लान?

पेपर लीक जैसे मामलों से परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। NEET जैसी परीक्षा में थोड़ी सी गड़बड़ी भी लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि इस बार सरकार परीक्षा से पहले ही सुरक्षा के हर पहलू को मजबूत करने में जुटी है।

छात्रों के लिए जरूरी सलाह

छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक वेबसाइट या सरकारी सूचना पर भरोसा करें। परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचें, एडमिट कार्ड और जरूरी दस्तावेज साथ रखें और किसी भी गलत गतिविधि से दूर रहें।

निष्कर्ष

21 जून की NEET-UG री-एग्जाम अब सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था की साख की भी बड़ी परीक्षा बन गई है। एयरफोर्स की संभावित भूमिका, हाई लेवल मीटिंग, कई मंत्रालयों की भागीदारी और PM स्तर तक निगरानी की खबरें साफ दिखाती हैं कि सरकार इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

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