Thursday, September 10, 2026
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बिहार में बाढ़ से स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित, शिक्षा विभाग ने मांगी रिपोर्ट; राहत शिविरों में पढ़ाएंगे शिक्षक

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पटना: बिहार में बाढ़ का असर अब सड़क, गांव और आम जनजीवन के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है। राज्य के कई इलाकों में बाढ़ का पानी स्कूल परिसरों और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कहीं विद्यालयों में पढ़ाई बंद करनी पड़ी है तो कहीं बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ रह रहे बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।

हालात को देखते हुए शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी जिलों से बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विभाग ने स्कूल भवन की स्थिति के साथ-साथ फर्नीचर, शैक्षणिक सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों को हुए नुकसान का भी आकलन करने का निर्देश दिया है।

कितने स्कूल बाढ़ से प्रभावित, जुटाया जा रहा आंकड़ा

बाढ़ की स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में शिक्षा विभाग के विशेष सचिव धर्मेंद्र कुमार ने अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का तत्काल आकलन करने का निर्देश दिया।

अधिकारियों से जिले में बाढ़ से प्रभावित स्कूलों की संख्या, पढ़ाई बाधित होने वाले विद्यालयों और भवनों एवं संसाधनों को हुए नुकसान की जानकारी मांगी गई है। स्कूलों की मौजूदा स्थिति का अद्यतन ब्योरा भी तैयार करने को कहा गया है।

जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर विभाग को यह पता चल सकेगा कि बाढ़ से शिक्षा व्यवस्था पर कितना असर पड़ा है। इसके बाद जरूरत के अनुसार स्कूलों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त संसाधनों की भरपाई और शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

राहत शिविरों में बच्चों को पढ़ाएंगे शिक्षक

बाढ़ प्रभावित इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती उन बच्चों की है, जिनके स्कूल बंद हैं और वे अपने परिवार के साथ राहत शिविरों में रह रहे हैं। शिक्षा विभाग ने ऐसे बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए राहत शिविरों में ही शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश दिया है।

विशेष सचिव धर्मेंद्र कुमार ने अधिकारियों से कहा है कि जिन विद्यालयों में बाढ़ के कारण पढ़ाई बंद है और वहां के बच्चे राहत शिविरों में रह रहे हैं, उन स्कूलों के शिक्षकों को संबंधित राहत शिविरों में प्रतिनियुक्त किया जाए।

इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि स्कूल बंद होने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई जारी रहे। राहत शिविरों में ही बच्चों के लिए आवश्यक शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बाढ़ की वजह से उनकी पढ़ाई का नुकसान कम से कम हो।

स्कूल भवन से फर्नीचर तक होगा नुकसान का आकलन

शिक्षा विभाग ने बाढ़ प्रभावित विद्यालयों का विस्तृत सर्वे कराने का निर्देश दिया है। इसमें स्कूल भवन के अलावा कक्षाओं, फर्नीचर, शैक्षणिक सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।

बाढ़ का पानी विद्यालय परिसरों तक पहुंचने से वहां रखी सामग्री को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए विभाग स्कूलवार नुकसान का ब्योरा जुटा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि किस विद्यालय में किस स्तर की क्षति हुई है और तत्काल किन संसाधनों की जरूरत है।

बाढ़ के बीच शिक्षा व्यवस्था पर विभाग की नजर

बिहार में हर साल बाढ़ बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। गंगा, गंडक, कोसी, बागमती, घाघरा, सोन और पुनपुन समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिलता है।

बाढ़ के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने, गांवों में पानी घुसने और लोगों के राहत शिविरों में जाने के बीच बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होती है। कई जगह स्कूल भवन पानी से घिर जाते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर विद्यालयों का इस्तेमाल राहत शिविर के तौर पर भी किया जाता है।

ऐसे में शिक्षा विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—बाढ़ से स्कूलों को हुए नुकसान का आकलन करना और साथ ही बच्चों की पढ़ाई को जारी रखना।

रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की रणनीति

जिलों से मिलने वाली विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग प्रभावित विद्यालयों के लिए आगे की रणनीति तैयार करेगा। जिन स्कूलों के भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहां मरम्मत की जरूरत का आकलन किया जाएगा। वहीं खराब फर्नीचर और शैक्षणिक सामग्री की भरपाई के लिए भी रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा।

फिलहाल शिक्षा विभाग का जोर इस बात पर है कि आपदा की स्थिति में भी बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित न हो। स्कूल की इमारत बंद हो सकती है, लेकिन बच्चों की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए। राहत शिविरों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति इसी दिशा में उठाया गया अहम कदम है।

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