Thursday, September 10, 2026
Home बिहार CM के दौरे के बाद राहत शिविर से चोकर ले जाने का...

CM के दौरे के बाद राहत शिविर से चोकर ले जाने का आरोप, जिला पशुपालन पदाधिकारी हटाए गए

23

हाजीपुर/वैशाली: बाढ़ प्रभावित लोगों और उनके मवेशियों के लिए बनाए गए राहत शिविर में रखे चोकर को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के तेरसिया स्थित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण कर लौटने के कुछ देर बाद मवेशियों के लिए रखा चोकर वापस ले जाने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

CM के निरीक्षण के बाद चोकर ले जाने का आरोप

जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सोमवार को तेरसिया स्थित बाढ़ राहत शिविर का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के साथ-साथ उनके पशुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री के लौटने के कुछ ही देर बाद पशुपालन विभाग की एंबुलेंस से शिविर में रखा चोकर दोबारा ले जाने की बात सामने आई। बताया गया कि मवेशियों के लिए रखे गए चोकर के करीब आठ बोरे कर्मियों ने एंबुलेंस पर लादे और वहां से लेकर चले गए।

घटना से जुड़ी रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी।

जिला पशुपालन पदाधिकारी हटाए गए

मामले में जिला पशुपालन पदाधिकारी उदय दत्ता कुमार पर कार्रवाई की गई है। उन्हें पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह हाजीपुर के अनुमंडल पशुपालन पदाधिकारी रंजीत कुमार शर्मा को जिला पशुपालन पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इसके अलावा उदय दत्ता कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने एंबुलेंस चालक और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं।

वायरल रिकॉर्डिंग से बढ़ा विवाद

मामले के बीच एक वायरल रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिससे विवाद और बढ़ गया। रिकॉर्डिंग में संबंधित पदाधिकारी के हवाले से कथित तौर पर यह बात कही जा रही है कि चोकर मवेशियों में बांटने के लिए नहीं लाया गया था। रिकॉर्डिंग में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कारण चोकर को विशेष रूप से रखवाए जाने की बात कहे जाने का दावा किया गया है।

वहीं, मौके पर मौजूद कुछ कर्मियों ने कथित तौर पर चोकर की गुणवत्ता खराब होने की बात भी कैमरे पर कही। कर्मियों की ओर से खराब चोकर की जगह दूसरा चोकर लाने की बात कहे जाने का भी दावा किया गया है।

हालांकि, वायरल रिकॉर्डिंग में कही गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है।

डीएम ने आरोपों को बताया गलत और निराधार

मामले पर वैशाली की जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि चोकर को केवल मुख्यमंत्री को दिखाने के लिए राहत शिविर में रखा गया था और मुख्यमंत्री के जाते ही उसे हटा दिया गया—यह आरोप गलत और निराधार है।

डीएम ने स्पष्ट किया कि राहत शिविर में पशुओं के लिए उपलब्ध कराए जा रहे चारे से संबंधित किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने एंबुलेंस चालक, संबंधित अधिकारी और उनकी टीम के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई के बाद यह मामला पशुपालन विभाग के स्तर पर भी गंभीर हो गया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राहत शिविर से चोकर वापस ले जाने की वास्तविक वजह क्या थी और इस पूरे मामले में किस-किस की भूमिका रही।

प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे में अब जांच की रिपोर्ट पर सबकी नजर है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here