पटना। बिहार की राजधानी पटना का प्राचीन नाम पाटलिपुत्र फिर से बहाल करने की मांग अब संसद के मंच तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र किए जाने पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
कुशवाहा ने कहा कि बिहार का इतिहास देश के गौरवशाली अतीत का अहम हिस्सा रहा है। प्राचीन काल में पाटलिपुत्र राजनीतिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। मौर्य और गुप्त काल में इस शहर का विशेष महत्व रहा और लंबे समय तक यह एक विशाल साम्राज्य की राजधानी के रूप में जाना जाता था।
ऐतिहासिक नाम वापस करने की मांग
राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि देश के कई शहरों के पुराने नामों को दोबारा बहाल किया गया है। ऐसे में पटना को भी उसके ऐतिहासिक नाम पाटलिपुत्र से पहचान दिलाने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे केवल नाम बदलने का विषय नहीं, बल्कि बिहार की ऐतिहासिक विरासत और लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया।
उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र की पहचान भारतीय इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रही है। गंगा के किनारे बसे इस शहर ने राजनीतिक सत्ता के साथ-साथ व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जेपी नड्डा के पटना से जुड़ाव का किया जिक्र
उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नड्डा का पटना से पुराना संबंध रहा है और उन्होंने यहां काफी समय बिताया है। ऐसे में बिहार की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े इस प्रस्ताव से उनका भी भावनात्मक जुड़ाव हो सकता है।
NDA सरकार में पहल की उम्मीद
RLM प्रमुख ने कहा कि फिलहाल केंद्र और बिहार दोनों जगह एनडीए की सरकार है। ऐसे में इस मांग पर आगे बढ़ने के लिए यह समय अनुकूल हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बिहार के गौरवशाली अतीत को सम्मान देने के उद्देश्य से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल की जाए।
हालांकि, पटना का आधिकारिक नाम बदलने के लिए निर्धारित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके लिए संबंधित स्तरों पर प्रस्ताव और मंजूरी की आवश्यकता होगी।
मौर्य काल में पाटलिपुत्र था सत्ता का केंद्र
इतिहास में पाटलिपुत्र का उल्लेख एक महत्वपूर्ण नगर के रूप में मिलता है। चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक के शासनकाल में यह मौर्य साम्राज्य की राजधानी रहा। उस दौर में पाटलिपुत्र से विशाल भूभाग का प्रशासन संचालित किया जाता था।
आज भी पटना में पाटलिपुत्र नाम से जुड़े कई स्थान मौजूद हैं, जो शहर के प्राचीन इतिहास की याद दिलाते हैं। अब राज्यसभा में उठी इस मांग के बाद एक बार फिर पटना के पुराने नाम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या आने वाले समय में पटना को आधिकारिक रूप से ‘पाटलिपुत्र’ नाम देने की दिशा में कोई प्रक्रिया शुरू होती है।







