पटना: भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए चर्चित पुलिस एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिवंगत भरत भूषण तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देगी और एक परिजन को सरकारी सेवा में नियुक्त किया जाएगा।
24 जुलाई को परिवार ने CM से की थी मुलाकात
भरत तिवारी के परिजनों ने 24 जुलाई को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास, एक अणे मार्ग में हुई इस मुलाकात में भरत तिवारी की मां आशा देवी समेत परिवार के अन्य सदस्य शामिल हुए थे।
बताया गया कि मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार को मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिलाया था। अब न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के बाद सरकार की ओर से सहायता और नौकरी देने का निर्णय सामने आया है।
17 जून को पुलिस मुठभेड़ में हुई थी मौत
यह मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का है। 17 जून को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। घटना के बाद उनके परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे।
परिजनों का आरोप था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। परिवार ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ हत्या का केस
मामला तूल पकड़ने के बाद तत्कालीन एसडीपीओ, थानेदार समेत कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। घटना को लेकर बिहार की राजनीति में भी काफी चर्चा हुई।
इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया। पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा को आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कई लोगों से हो चुकी है पूछताछ
जांच के दौरान आयोग ने भरत तिवारी के परिजनों, प्रत्यक्षदर्शियों, पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी जुटाई है। घटना से संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है। हालांकि, एनकाउंटर की वास्तविक परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक जांच की पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।







