पटना: बिहार में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय और सामाजिक संतुलन को प्रमुखता दी गई है। गुरुवार को हुए विस्तार के बाद 34 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को मिला है।
इसके अलावा दलित, ओबीसी, सवर्ण और अल्पसंख्यक समुदायों को भी संतुलित भागीदारी देने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए NDA की सामाजिक इंजीनियरिंग रणनीति का हिस्सा है।
EBC वर्ग को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व
नए मंत्रिमंडल में EBC वर्ग पर सबसे ज्यादा फोकस दिखाई दिया।
EBC समुदाय से जिन नेताओं को मंत्री बनाया गया है, उनमें शामिल हैं:
- दिलीप कुमार जायसवाल
- केदार गुप्ता (कानू)
- प्रमोद चंद्रवंशी
- अरुण शंकर प्रसाद (सूढ़ी)
- श्वेता गुप्ता (तलवार)
- रमा निषाद
- मदन सहनी
- शीला मंडल
- दामोदर रावत
- बुलो मंडल
मल्लाह, धानुक, गंगोता और अन्य अति पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने ग्रामीण और पिछड़े वर्गों के बीच मजबूत राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
सवर्ण नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी
मंत्रिमंडल में सवर्ण वर्ग से कुल 9 नेताओं को जगह दी गई है।
भूमिहार समाज से:
- विजय चौधरी
- विजय सिन्हा
- कुमार शैलेन्द्र
ब्राह्मण समाज से:
- नीतीश मिश्रा
- मिथिलेश तिवारी
राजपूत समाज से:
- लेसी सिंह
- संजय सिंह टाइगर
- श्रेयसी सिंह
- संजय कुमार सिंह







