(संवाददाता)
पटना।
हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिंदी दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रसिद्ध शिक्षाविद् Dr. Kumud Verma ने लोगों से अपने दैनिक जीवन में हिंदी को अधिकाधिक अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हिंदी को सामान्य कामकाज और संवाद की भाषा बनाया जाए तो समाज के बड़े वर्ग को सुविधा मिलेगी और भाषा के प्रति आत्मीयता भी बढ़ेगी।
डॉ. वर्मा ने कहा कि आज के दौर में वैश्वीकरण और तकनीकी विकास के कारण युवाओं का रुझान अंग्रेजी तथा अन्य विदेशी भाषाओं की ओर बढ़ा है। नई भाषाएं सीखना निश्चित रूप से ज्ञानवर्धक और आवश्यक है, लेकिन अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के महत्व को भूल जाना उचित नहीं माना जा सकता। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह हमारी संस्कृति, इतिहास और सामाजिक मूल्यों की संवाहक भी होती है।
उन्होंने अभिभावकों से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ हिंदी का भी समुचित ज्ञान अवश्य दिया जाना चाहिए। घरों में मातृभाषा के साथ हिंदी में संवाद करने की आदत विकसित करने से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहेगी और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना भी मजबूत होगी।
डॉ. वर्मा के अनुसार हिंदी आज साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा, प्रशासन और डिजिटल माध्यमों में तेजी से अपना दायरा बढ़ा रही है। हिंदी साहित्य के कवि, लेखक और रचनाकार राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के विस्तार ने हिंदी के प्रसार को नई गति प्रदान की है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और निजी संस्थानों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बैंकों और कई सरकारी कार्यालयों में राजभाषा विभाग सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को अपनी भाषा में सेवाएं प्राप्त करने में सुविधा हो रही है।
हिंदी पत्रकारिता के संदर्भ में चर्चा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार Rudradev Jha ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता आज भी देश के सबसे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचने का माध्यम है। हालांकि अंग्रेजी पत्रकारिता और कॉरपोरेट संस्कृति के बढ़ते प्रभाव ने हिंदी के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं, फिर भी हिंदी मीडिया की स्वीकार्यता लगातार बनी हुई है।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में अंग्रेजी बोलने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है, जिसके कारण कई बार लोग हिंदी बोलने में संकोच महसूस करते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हिंदी को हीन भावना से नहीं, बल्कि गर्व और आत्मविश्वास के साथ अपनाया जाए।
हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष Prem Kumar द्वारा दी गई शुभकामनाओं का भी स्वागत किया गया। विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक और पत्रकारिता संगठनों ने इसे हिंदी भाषा और हिंदी पत्रकारिता के सम्मान की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हिंदी के विकास और प्रसार के लिए केवल सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। जब हिंदी घर-घर, कार्यालयों, विद्यालयों और सार्वजनिक जीवन की सहज भाषा बनेगी, तभी उसका वास्तविक विस्तार और सम्मान सुनिश्चित हो सकेगा।







