पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव की तारीखों से पहले ही NDA के अंदर सीट शेयरिंग और उम्मीदवारों के चयन को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। बीजेपी, जेडीयू, लोजपा (रामविलास), हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे सहयोगी दल अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
बिहार विधान परिषद की कुल 10 सीटों को लेकर राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। इनमें 9 सीटें खाली हो रही हैं और एक सीट पर उपचुनाव की स्थिति है। रिपोर्ट्स के अनुसार NDA में बीजेपी और जेडीयू बराबर-बराबर सीटों पर दावा कर सकती हैं, जबकि सहयोगी दल भी अपने हिस्से की सीट मांग रहे हैं।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सीटें कम हैं और दावेदार ज्यादा। बीजेपी के भीतर कई नेता टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं। वहीं जेडीयू भी अपने पुराने और भरोसेमंद चेहरों को जगह देने की तैयारी में है। सहयोगी दल लोजपा (रामविलास), हम और राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी चाहते हैं कि विधान परिषद में उनका प्रतिनिधित्व दिखे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले NDA के अंदर शक्ति संतुलन का भी संकेत देगा। कौन-सा दल कितनी सीट पाता है, इससे गठबंधन के अंदर उसकी पकड़ और राजनीतिक वजन का अंदाजा लगेगा।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी उम्मीदवार चयन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। NDA नेतृत्व ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहता है, जो संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों में भी फिट बैठें। यही वजह है कि उम्मीदवारों की घोषणा में सावधानी बरती जा रही है।
विपक्ष भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। RJD और कांग्रेस NDA के अंदर सीट बंटवारे को लेकर बन रही खींचतान को मुद्दा बना सकते हैं। ऐसे में आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, बिहार MLC चुनाव ने चुनावी माहौल को फिर से गर्म कर दिया है। NDA में मंथन तेज है, दावेदार सक्रिय हैं और सबकी निगाहें अब उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं।







