Tuesday, July 14, 2026
Home hELTH Helth क्या पीरियड्स में होती है हेवी ब्लीडिंग? जानिए कब तक है नॉर्मल...

क्या पीरियड्स में होती है हेवी ब्लीडिंग? जानिए कब तक है नॉर्मल और कब बन सकती है गंभीर बीमारी का संकेत

104

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते तनाव के बीच महिलाओं में पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें सबसे आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है — पीरियड्स के दौरान जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग होना। कई महिलाएं इसे सामान्य मानकर सहन करती रहती हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर हेवी ब्लीडिंग सामान्य नहीं होती। कई बार यह शरीर में किसी गंभीर बीमारी या हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है।

गायनाकोलॉजिस्ट के अनुसार सामान्य पीरियड्स आमतौर पर 21 से 35 दिनों के अंतराल पर आते हैं और 3 से 7 दिनों तक चलते हैं। इस दौरान होने वाली ब्लीडिंग सीमित मात्रा में होती है। लेकिन अगर किसी महिला को हर 1–2 घंटे में पैड बदलना पड़ रहा हो, रात में बार-बार उठकर पैड बदलना पड़े, बड़े-बड़े ब्लड क्लॉट्स निकल रहे हों या पीरियड्स लगातार एक हफ्ते से ज्यादा चल रहे हों, तो इसे हेवी मेंस्ट्रुअल ब्लीडिंग यानी Menorrhagia माना जाता है।

किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

डॉक्टर बताते हैं कि कुछ लक्षण शरीर की गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं। जैसे:

  • लगातार बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना
  • पीरियड्स के दौरान तेज दर्द या पेट में ऐंठन
  • चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना
  • थोड़ी देर चलने पर भी सांस फूलना
  • चेहरे और शरीर में पीलापन दिखना
  • पीरियड्स खत्म होने के बाद भी स्पॉटिंग होना
  • अचानक अनियमित पीरियड्स शुरू हो जाना

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इनमें से कोई भी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

क्यों होती है हेवी ब्लीडिंग?

डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण हार्मोनल असंतुलन माना जाता है। जब शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो पीरियड्स अनियमित और ज्यादा ब्लीडिंग वाले हो सकते हैं।

इसके अलावा कई मेडिकल समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं:

1. PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम)

आजकल युवा महिलाओं में तेजी से बढ़ रही यह समस्या हार्मोनल बदलाव पैदा करती है, जिससे पीरियड्स अनियमित और हेवी हो जाते हैं।

2. गर्भाशय में फाइब्रॉइड

गर्भाशय में बनने वाली गांठें कई बार अत्यधिक ब्लीडिंग और दर्द का कारण बनती हैं।

3. थायरॉइड की समस्या

थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन भी पीरियड्स को प्रभावित करता है।

4. एंडोमेट्रियोसिस

यह ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत बाहर बढ़ने लगती है, जिससे दर्द और भारी ब्लीडिंग हो सकती है।

5. शरीर में खून की कमी

आयरन की कमी से भी पीरियड्स की समस्या बढ़ सकती है और हेवी ब्लीडिंग होने पर एनीमिया का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी है?

डॉक्टरों के अनुसार अगर ब्लीडिंग इतनी ज्यादा हो कि रोजमर्रा का काम प्रभावित होने लगे, कमजोरी लगातार बढ़ रही हो या अचानक बहुत ज्यादा ब्लीडिंग शुरू हो जाए, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

खासतौर पर इन स्थितियों में तुरंत मेडिकल सलाह जरूरी है:

  • लगातार 7 दिनों से ज्यादा ब्लीडिंग
  • हर घंटे पैड पूरी तरह भर जाना
  • खून के बड़े-बड़े थक्के निकलना
  • बेहोशी जैसा महसूस होना
  • बहुत तेज पेट दर्द
  • प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग

क्या हो सकते हैं इसके नुकसान?

अगर लंबे समय तक हेवी ब्लीडिंग होती रहे और इलाज न कराया जाए, तो शरीर में खून की भारी कमी हो सकती है। इससे एनीमिया, कमजोरी, चक्कर, दिल की धड़कन तेज होना और गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है।

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

विशेषज्ञ महिलाओं को सलाह देते हैं कि वे अपने पीरियड्स के पैटर्न पर ध्यान दें और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।

डॉक्टरों के अनुसार आयरन युक्त भोजन जैसे हरी सब्जियां, चुकंदर, अनार, गुड़, दालें और पर्याप्त पानी शरीर को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा लेने से बचना चाहिए।

महिलाओं की सेहत से जुड़ी यह समस्या जितनी सामान्य दिखती है, कई बार उतनी ही गंभीर भी हो सकती है। इसलिए समय रहते सही जांच और इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here