Monday, July 6, 2026
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शेखपुरा में 5 साल के बच्चे के अपहरण से सनसनी, 10 लाख की फिरौती मांगने का आरोप

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शेखपुरा।

बिहार के Sheikhpura जिले के कसार थाना क्षेत्र स्थित बरसा गांव से 5 वर्षीय दीपांशु कुमार के कथित अपहरण का मामला सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। आरोप है कि बच्चे को 10 लाख रुपये की फिरौती के लिए अगवा किया गया है। घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच में जुटी हुई है।

अचानक लापता हुआ था बच्चा

कसार थानाध्यक्ष संतोष कुमार के अनुसार, बरसा गांव निवासी कन्हैया पंडित का 5 वर्षीय बेटा दीपांशु कुमार 6 मई को अचानक लापता हो गया था। शुरू में परिवार और ग्रामीणों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने के बाद पुलिस को सूचना दी गई।

जांच के दौरान परिवार को मोबाइल पर व्हाट्सएप मैसेज के जरिए 10 लाख रुपये की फिरौती मांगने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामले को अपहरण मानते हुए जांच तेज कर दी।

दो आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बरसा गांव निवासी प्रदीप मांझी और संतोष रविदास के रूप में हुई है। वहीं दो अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस जांच में पता चला है कि बच्चे के पिता के मोबाइल पर जो व्हाट्सएप मैसेज भेजे जा रहे थे, वे कथित तौर पर संतोष रविदास के सिम कार्ड से किए गए थे। ग्रामीणों का दावा है कि पूरे मामले का मुख्य आरोपी प्रदीप मांझी है।

डॉग स्क्वायड और साइबर टीम भी जुटी

मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 मई को एसपी बलीराम चौधरी के निर्देश पर डॉग स्क्वायड की टीम भी गांव पहुंची थी। पुलिस तकनीकी और साइबर जांच के जरिए बच्चे तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, फिरौती के लिए भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज का लोकेशन दिल्ली के एक ईंट भट्ठे के आसपास मिला है। पुलिस ने इस सुराग के आधार पर कई स्थानों पर जांच की, लेकिन अभी तक बच्चे का कोई पता नहीं चल सका है।

ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

घटना को लेकर गांव में तनाव और भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि छापेमारी की जानकारी पहले ही आरोपियों तक पहुंच गई थी, जिसके कारण वे अपना ठिकाना बदलने में सफल हो गए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती से कार्रवाई की जाती तो शायद बच्चे का सुराग जल्द मिल सकता था।

साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क पर शक

ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, इस अपहरण के पीछे साइबर अपराध से जुड़े लोगों का हाथ हो सकता है। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ गुट साइबर क्राइम गतिविधियों में शामिल हैं और पैसों के बंटवारे को लेकर उनके बीच विवाद चल रहा था।

इसी विवाद के बाद कथित तौर पर बच्चे के अपहरण की घटना को अंजाम दिया गया। हालांकि पुलिस अभी इस एंगल की भी जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

दीपांशु के लापता होने के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी बच्चे की सकुशल बरामदगी की दुआ कर रहे हैं। परिजन लगातार पुलिस से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

लगातार जारी है छापेमारी

पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर बच्चे को सुरक्षित बरामद करने की कोशिश की जा रही है।

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