Saturday, September 5, 2026
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भागलपुर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM सम्राट चौधरी, गंगा समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर पर चिंता

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भागलपुर। बिहार में लगातार बढ़ रहे बाढ़ के खतरे के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को भागलपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से नदियों के बढ़ते जलस्तर, कटाव और तटबंधों की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्रशासन की नजर गंगा के साथ-साथ सोन, कोसी और गंडक नदी के जलस्तर एवं जलप्रवाह पर भी बनी हुई है।

सोन से 6.30 लाख क्यूसेक पानी आने की बात

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि सोन नदी से करीब 6.30 लाख क्यूसेक पानी आने की जानकारी है। इसके अलावा कोसी और गंडक नदी से भी लगातार पानी गंगा में पहुंच रहा है। गंगा में पहले से ही काफी मात्रा में पानी मौजूद है। ऐसे में आने वाले समय में जलस्तर और प्रवाह की लगातार निगरानी बेहद जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमुख नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की तैयारियां मजबूत रखी जाएं।

कटाव रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर निगरानी

भागलपुर में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने नदी के कटाव को भी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कई स्थानों पर कटाव रोकने के लिए काम किया गया है और आवश्यकता के अनुसार आगे भी कार्य जारी रहेगा।

नदी के तेज बहाव के कारण होने वाला कटाव सड़क, खेत, मकान और अन्य सरकारी एवं निजी संपत्तियों के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में संवेदनशील स्थानों पर पहले से तैयारी और लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

कोसी, गंडक और सोन के बहाव पर भी नजर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोसी नदी के बहाव को व्यवस्थित करने के साथ-साथ गंडक और सोन नदी की स्थिति पर भी लगातार नजर रख रही है। इन नदियों से आने वाला पानी सीधे तौर पर गंगा के जलस्तर और प्रवाह को प्रभावित करता है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी प्रमुख नदियों की स्थिति की नियमित निगरानी की जाए और जलप्रवाह में किसी भी तरह के असामान्य बदलाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जाए।

गंगा के तटबंधों के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंगा नदी के एंबैंकमेंट यानी तटबंध व्यवस्था को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदी के बहाव और आसपास के इलाकों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, कई स्थानों पर एंबैंकमेंट का क्षेत्र करीब 20 से 26 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसकी संरचना और चौड़ाई को व्यवस्थित करने के साथ नदी के बहाव के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

जहां आवश्यकता होगी, वहां तटबंधों को मजबूत करने और उनकी संरचना में सुधार के निर्देश दिए गए हैं।

गंगा में ड्रेजिंग कराने की तैयारी

गंगा में ड्रेजिंग की व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। ड्रेजिंग के जरिए नदी में जमा गाद और अन्य अवरोधों को हटाकर जलप्रवाह को बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि नदी के बहाव वाले हिस्से को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करने से बाढ़ के दौरान पानी के दबाव को नियंत्रित करने और संवेदनशील इलाकों में कटाव के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन अलर्ट

बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। सोन, कोसी और गंडक से आने वाले पानी का असर गंगा के जलप्रवाह पर भी पड़ रहा है। ऐसे में भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे इलाकों में प्रशासन को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री के भागलपुर दौरे के दौरान अधिकारियों से राहत, बचाव, कटाव नियंत्रण और तटबंधों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं।

तत्काल राहत के साथ स्थायी समाधान पर जोर

मुख्यमंत्री के निर्देशों से संकेत मिलता है कि सरकार बाढ़ के दौरान तत्काल राहत और बचाव के साथ-साथ बाढ़ और कटाव की समस्या के दीर्घकालिक समाधान पर भी जोर दे रही है।

गंगा, कोसी, गंडक और सोन जैसी प्रमुख नदियों के जलप्रवाह को व्यवस्थित करने, तटबंधों को मजबूत करने और जरूरत के अनुसार ड्रेजिंग कराने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम आने वाले समय में बिहार के बाढ़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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