पटना। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष लगातार राज्य में अवैध शराब की बिक्री और जहरीली शराब की घटनाओं का हवाला देकर सरकार की शराबबंदी नीति पर सवाल उठा रहा है। वहीं, बिहार सरकार के मध्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि शराबबंदी कानून राज्य में प्रभावी है और इसे आगे भी पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाएगा।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री मदन सहनी ने कहा कि बिहार में अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू है। सरकार इस नीति को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष के आरोपों पर मंत्री का पलटवार
शराबबंदी को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार सरकार पर निशाना साधा जाता रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद राज्य में शराब की तस्करी और अवैध बिक्री जारी है। कई बार शराब बरामदगी और जहरीली शराब से जुड़ी घटनाओं को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाते हैं।
इन आरोपों पर मंत्री मदन सहनी ने कहा कि सरकार शराबबंदी के फैसले से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई कर रहा है और आगे भी इस अभियान को जारी रखा जाएगा।
महिलाओं और परिवारों पर सकारात्मक असर का दावा
मंत्री ने शराबबंदी के सामाजिक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि इस फैसले से महिलाओं और परिवारों को फायदा हुआ है। सरकार का मानना है कि शराब पर प्रतिबंध से सामाजिक वातावरण में सकारात्मक बदलाव आया है और परिवारों में आर्थिक एवं सामाजिक स्तर पर सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि शराबबंदी को प्रभावी बनाए रखने के लिए पुलिस और उत्पाद विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। शराब की तस्करी, बिक्री और सेवन से जुड़े मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है।
सरकार ने साफ किया अपना रुख
मदन सहनी ने दोहराया कि बिहार सरकार शराबबंदी की नीति को लेकर अपने रुख में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून पहले की तरह लागू है और भविष्य में भी इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता रहेगा।
मंत्री के इस बयान के बाद साफ है कि शराबबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव आगे भी जारी रह सकता है। जहां विपक्ष कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार इसे सामाजिक सुधार का महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके पक्ष में मजबूती से खड़ी है।







