पटना: खान ग्लोबल स्टडीज परिसर में हुई मारपीट और गोलीबारी के मामले में गिरफ्तार कोचिंग संचालक रोशन आनंद को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा से मामले की रिपोर्ट तलब की है। साथ ही तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट नहीं देने पर आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
मामला खान ग्लोबल स्टडीज परिसर में हुई कथित मारपीट और फायरिंग से जुड़ा है। पुलिस ने रोशन आनंद को मामले में कथित तौर पर मुख्य सूत्रधार मानते हुए गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठे और निष्पक्ष जांच की मांग सामने आई।
मानवाधिकार संगठन ने की थी शिकायत
इस मामले में ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के चेयरमैन विशाल रंजन दफ्तुआर ने 10 जून को NHRC में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में रोशन आनंद की गिरफ्तारी की प्रक्रिया और पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रोशन आनंद को पर्याप्त जांच और साक्ष्यों के बिना आपराधिक मामले में फंसाया गया। पुलिस की कार्रवाई को भी एकतरफा बताए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष और जांच से जुड़े सभी तथ्य सामने आना अभी बाकी है।
रिपोर्ट नहीं देने पर आयोग ने जताई नाराजगी
बताया जा रहा है कि NHRC ने पहले भी पटना पुलिस से मामले में रिपोर्ट मांगी थी। निर्धारित समय में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद आयोग ने दोबारा जवाब तलब किया है। आयोग ने 3 सितंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आयोग की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
रोशन आनंद की बीमारी का भी शिकायत में जिक्र
शिकायत में रोशन आनंद की स्वास्थ्य स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि वह किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। इसी आधार पर गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब पटना पुलिस की रिपोर्ट इस मामले में अहम होगी। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि रोशन आनंद की गिरफ्तारी किन परिस्थितियों में हुई, उनके खिलाफ जांच में क्या साक्ष्य मिले और गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।
NHRC के रुख के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप या आयोग की ओर से रिपोर्ट तलब किया जाना किसी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष साबित नहीं करता। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।







