“बिन पानी सब सून” — लगातार कटौती से लोगों का फूटा गुस्सा, विभाग पर तैयारी में लापरवाही के आरोप
प्रभाकर | काशी/वाराणसी
भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच Varanasi तथा आसपास के क्षेत्रों में बिजली संकट अब आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। दिनभर की तपती धूप और रात की उमस भरी गर्मी के बीच लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालत यह है कि कई मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को रातभर जागकर समय बिताना पड़ रहा है।
गर्मी के इस मौसम में सबसे बड़ी समस्या पानी की हो गई है। बिजली नहीं रहने के कारण घरों में लगे मोटर और सबमर्सिबल पंप बंद पड़े हैं, जिससे टंकियों में पानी नहीं चढ़ पा रहा। कई परिवारों को सुबह-सुबह पानी भरने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “बिन पानी सब सून” की कहावत अब सच होती दिखाई दे रही है। बिजली कटने के साथ ही पंखे, कूलर और पानी—तीनों सुविधाएं एक साथ बंद हो जाती हैं। ऐसे में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।
विभाग का दावा — बढ़ी खपत बनी संकट की वजह
बिजली विभाग का कहना है कि इस बार गर्मी में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली की खपत बढ़ी है। एसी, कूलर, फ्रीज और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली नेटवर्क पर भारी दबाव पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार कई जगह ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड हो रहे हैं, जिससे फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या बढ़ गई है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि लगातार बढ़ती मांग के कारण लोड मैनेजमेंट करना मजबूरी बन गया है। हालांकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग हर साल यही दलील देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया जाता।
“हर साल यही हाल, फिर तैयारी क्यों नहीं?”
स्थानीय उपभोक्ता चंद्र सेन ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गर्मी कोई अचानक आने वाली स्थिति नहीं है। विभाग को पहले से अनुमान लगाकर ट्रांसफॉर्मर, तार और सप्लाई सिस्टम को मजबूत करना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि कई इलाकों में बिजली चोरी लगातार जारी है, जिससे लाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अगर विभाग समय रहते कार्रवाई करे तो सामान्य उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
ग्रामीण इलाकों में और गंभीर हालात
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। किसान ममलू और व्यवसायी मंगल तिवारी ने बताया कि इस समय गंगा का जलस्तर नीचे चला जाता है, जिससे चापाकल और हैंडपंप पहले ही कमजोर पड़ जाते हैं। ऊपर से बिजली कटौती होने पर पानी की भारी किल्लत शुरू हो जाती है।
कई गांवों में लोग रात के समय बिजली आने का इंतजार करते रहते हैं ताकि मोटर चलाकर पानी भर सकें। लेकिन अनियमित सप्लाई के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
व्यापार और पढ़ाई पर भी असर
लगातार बिजली कटौती का असर छोटे कारोबारियों और छात्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दुकानदारों का कहना है कि बिजली नहीं रहने से ग्राहक कम आ रहे हैं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। वहीं छात्र उमस और अंधेरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
इन्वर्टर और जनरेटर का सहारा लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है, लेकिन लगातार कटौती के कारण इन्वर्टर भी जवाब देने लगे हैं। डीजल और बैटरी का खर्च बढ़ने से मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगड़ रहा है।
लोगों की मांग — स्थायी समाधान हो
स्थानीय नागरिकों ने शासन और बिजली विभाग से मांग की है कि केवल अस्थायी घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। लोगों का कहना है कि गर्मी शुरू होने से पहले बिजली व्यवस्था को मजबूत करना, ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाना, बिजली चोरी रोकना और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी है।
नागरिकों का कहना है कि अगर जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में पानी और बिजली का संकट और गंभीर रूप ले सकता है। गर्मी के इस कठिन दौर में लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत राहत और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति की है।







