Pramod Kumar Chandravanshi इन दिनों बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले चेहरों में शामिल हो गए हैं। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद हर तरफ उनके संघर्ष की कहानी चर्चा में है।
जहानाबाद के नेरथुआ मठ गांव से निकलकर मंत्री पद तक पहुंचने का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे प्रमोद चंद्रवंशी ने गरीबी और कठिन परिस्थितियों से लड़ते हुए राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
साइकिल पर अखबार और तेल बेचकर की पढ़ाई
आज भले ही Pramod Kumar Chandravanshi बिहार सरकार में मंत्री बन चुके हों, लेकिन उनका शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए वे पटना की सड़कों पर साइकिल से अखबार बांटा करते थे।
इसके अलावा वे घर-घर जाकर सरसों का तेल भी बेचते थे। सुबह अखबार बांटना और दिन में छोटे-मोटे काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इसी मेहनत से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और राजनीति की राह पकड़ी।
दिलचस्प बात यह है कि उनका सरसों तेल का व्यवसाय आज भी जारी है, जिसे अब उनके कर्मचारी संभालते हैं।
झोपड़ी से मंत्रालय तक का सफर
गांव के लोगों के अनुसार कुछ साल पहले तक उनका पैतृक घर कच्चा और झोपड़ीनुमा था। बाद में परिवार और भाइयों के सहयोग से छोटा पक्का मकान बनाया गया।
उनके परिवार की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके भाई पटना की गैस एजेंसी में मामूली वेतन पर नौकरी करते थे।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) से छात्र जीवन में जुड़कर प्रमोद चंद्रवंशी ने राजनीति में कदम रखा था। धीरे-धीरे संगठन और जनता के बीच सक्रियता बढ़ी और वे बिहार की राजनीति में मजबूत नेता बनकर उभरे।
वे पहले भी बिहार सरकार में वन, पर्यावरण और सहकारिता मंत्री रह चुके हैं। अब एक बार फिर उन्हें सम्राट सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
Pramod Kumar Chandravanshi की कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और लगन से सफलता हासिल की जा सकती है।
आज उनके मंत्री बनने की खबर से पूरे जहानाबाद जिले में खुशी का माहौल है और लोग उनकी सादगी, संघर्ष और ईमानदारी की तारीफ कर रहे हैं।







