पटना: बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की एक बैठक को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कैबिनेट की बैठक समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री ने बीजेपी कोटे के मंत्रियों के साथ अलग से बैठक की। खास बात यह रही कि इस बैठक में एनडीए के अन्य सहयोगी दलों से जुड़े मंत्रियों को शामिल नहीं किया गया। इसी को लेकर अब विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने इस बैठक को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इसे महज सामान्य बैठक मानना सही नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि बैठक के पीछे कोई अहम राजनीतिक वजह हो सकती है और आने वाले दिनों में इसका असर दिखाई दे सकता है।
‘बैठक के पीछे जरूर कोई वजह है’
भाई वीरेंद्र ने कहा कि अगर यह सिर्फ सामान्य प्रशासनिक चर्चा थी तो मुख्यमंत्री को सभी मंत्रियों के साथ बैठक करनी चाहिए थी। केवल बीजेपी के मंत्रियों को अलग से बुलाए जाने पर उन्होंने सवाल खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि एनडीए के दूसरे घटक दलों के मंत्री भी यह जानना चाहेंगे कि मुख्यमंत्री और बीजेपी मंत्रियों के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई। आरजेडी विधायक ने कहा कि इस तरह की अलग बैठक स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा को जन्म देती है।
‘ऑल इज वेल’ वाली बात नहीं
भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में यह कहना मुश्किल है कि बिहार की सत्ता में सब कुछ पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने कहा कि बैठक का एजेंडा अगर प्रशासनिक था तो उसमें एनडीए के सभी मंत्रियों को शामिल किया जा सकता था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बैठक विकास कार्यों को लेकर हुई, बीजेपी के संगठन से संबंधित विषयों पर हुई या फिर किसी बड़े राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी।
‘कुछ तो पक रहा है’
आरजेडी विधायक ने अपने अंदाज में कहा कि उन्हें लगता है कि ‘कहीं न कहीं खिचड़ी पक रही है।’ उन्होंने मुख्यमंत्री के आसपास चल रही राजनीतिक गतिविधियों का भी जिक्र किया। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस संभावित राजनीतिक घटनाक्रम की ओर इशारा कर रहे हैं।
उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में अटकलें और तेज हो गई हैं। हालांकि, बैठक को लेकर सरकार या बीजेपी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे इसके राजनीतिक एजेंडे की पुष्टि हो।
विपक्ष को किसी टूट का इंतजार नहीं: भाई वीरेंद्र
एनडीए में संभावित मतभेद या टूट की स्थिति से विपक्ष को होने वाले फायदे के सवाल पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि उनकी पार्टी किसी दूसरे दल के टूटने पर निर्भर नहीं है। आरजेडी अपने मुद्दों और संगठन की ताकत के आधार पर जनता के बीच जाएगी।
फिलहाल मुख्यमंत्री और बीजेपी मंत्रियों की इस अलग बैठक का वास्तविक एजेंडा स्पष्ट नहीं है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस बैठक के बाद कोई राजनीतिक या संगठनात्मक फैसला सामने आता है या नहीं।







