पटना:
राजधानी पटना एक बार फिर रसोई गैस संकट की चपेट में है। हालात ऐसे बन गए हैं कि हजारों परिवारों के सामने रोजमर्रा का खाना बनाना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें समय पर डिलीवरी नहीं मिल रही है। कई लोगों का कहना है कि 20 से 25 दिन पहले बुकिंग कराने के बाद भी सिलेंडर 10 से 14 दिन की अतिरिक्त देरी से पहुंच रहा है, जिससे घरों की रसोई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में गैस सिलेंडरों का बैकलॉग बढ़कर लगभग 1.98 लाख तक पहुंच चुका है। इसका सीधा मतलब है कि मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
मैसेज कुछ, हकीकत कुछ और
उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसियों की ओर से पहले सात दिन में डिलीवरी का संदेश भेजा जाता है, लेकिन बाद में डिलीवरी की तारीख बदल दी जाती है। कभी 7 दिन, तो कभी 14 दिन का नया संदेश भेजा जाता है। इससे लोगों में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं।
कई परिवारों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में इंडक्शन चूल्हा या लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन हो गई है।
रविवार की छुट्टी बना संकट का बड़ा कारण
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार संकट का एक बड़ा कारण रविवार को गैस डिलीवरी बंद रहना भी है। बताया जा रहा है कि रविवार के दिन लगभग 20 हजार से अधिक नई बुकिंग जमा हो जाती हैं, लेकिन डिलीवरी नहीं होने से अगले दिन से बैकलॉग और बढ़ जाता है।
यही कारण है कि सप्ताह दर सप्ताह लंबित बुकिंग का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। प्रशासन ने एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे अन्य दिनों में अतिरिक्त डिलीवरी कर बैकलॉग कम करें, लेकिन अब तक इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया है।
कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग का खेल तेज
गैस संकट के बीच कालाबाजारी का कारोबार भी तेजी से फैलने लगा है। जानकारी के अनुसार कई होटल, ढाबे और छोटे व्यवसायी महंगे कमर्शियल सिलेंडर की जगह घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं।
इसके अलावा शहर के कई इलाकों में छोटे सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग का धंधा भी खुलेआम चल रहा है। बताया जा रहा है कि प्रति किलो गैस के हिसाब से 150 से 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह कारोबार न केवल गैरकानूनी है बल्कि बेहद खतरनाक भी माना जाता है।
मांग ज्यादा, सप्लाई कम
आंकड़ों के अनुसार पटना जिले में रोजाना लगभग 30,359 गैस सिलेंडरों की जरूरत है, जबकि आपूर्ति केवल 28,221 सिलेंडरों तक सीमित है। यही कमी लगातार संकट को गहरा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सप्लाई बढ़ाकर मांग के बराबर नहीं लाई जाएगी, तब तक उपभोक्ताओं को राहत मिलना मुश्किल है।
136 एजेंसियों में 12 संवेदनशील घोषित
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जिले की 136 गैस एजेंसियों में से 12 एजेंसियों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इन एजेंसियों पर विशेष निगरानी के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
इसके बावजूद उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई जगहों पर लोगों ने एजेंसियों के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया है।
छापेमारी जारी, लेकिन राहत नहीं
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन महीनों में 28 विशेष छापामार टीमों ने कार्रवाई करते हुए 29 एफआईआर दर्ज की हैं और 201 गैस सिलेंडर जब्त किए हैं।
हालांकि इन कार्रवाइयों के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे रहा। उपभोक्ताओं का कहना है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीन पर गैस संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।
जनता में बढ़ रहा गुस्सा
पटना के विभिन्न इलाकों में लोग गैस डिलीवरी में देरी को लेकर नाराज नजर आ रहे हैं। गृहिणियों का कहना है कि समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से पूरे घर की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
लोगों की मांग है कि सरकार और प्रशासन जल्द से जल्द आपूर्ति बढ़ाए, कालाबाजारी पर सख्ती करे और गैस एजेंसियों की जवाबदेही तय करे ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
फिलहाल राजधानी में गैस सिलेंडर संकट लोगों की सबसे बड़ी घरेलू परेशानियों में शामिल हो गया है और हर किसी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।







