Monday, July 6, 2026
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Cannes 2026 में चमकी भारतीय क्लासिक फिल्म, 4 दशक बाद भी कायम है जादू

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भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर में कई ऐसी फिल्में बनीं जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर को भी बड़े पर्दे पर उतारा। उस समय की कई फिल्मों में आम लोगों की जिंदगी, गरीबी, सामाजिक बदलाव, रिश्तों की जटिलता और इंसानी संघर्ष को बेहद सादगी और संवेदनशीलता के साथ दिखाया जाता था। बड़े सेट, भारी बजट और ग्लैमर से दूर ये फिल्में अपनी मजबूत कहानी और गहरे भावनात्मक प्रभाव के लिए जानी जाती थीं।

खासतौर पर भारतीय रीजनल सिनेमा ने इस दिशा में अहम भूमिका निभाई। बंगाली, मलयालम, मराठी और तमिल सिनेमा में कई ऐसे फिल्मकार उभरे जिन्होंने अलग तरह की और यथार्थवादी फिल्में बनाकर अपनी खास पहचान बनाई। मलयालम सिनेमा में भी 1980 के दशक में ऐसी कई क्लासिक फिल्में बनीं, जिन्हें आज भी विश्व सिनेमा में सम्मान के साथ याद किया जाता है।

इसी दौर में करीब 40 साल पहले बनी एक मलयालम फिल्म ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। Piravi का विशेष प्रदर्शन 2026 Cannes Film Festival में किया गया, जहां इसे क्लासिक भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल कर सम्मानित किया गया। यह फिल्म प्रसिद्ध निर्देशक Shaji N. Karun द्वारा निर्देशित थी और इसे भारतीय समानांतर सिनेमा की सबसे संवेदनशील फिल्मों में गिना जाता है।

फिल्म की कहानी एक ऐसे पिता के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने लापता बेटे के इंतजार में जिंदगी बिताता रहता है। यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर भी गहरी टिप्पणी करती है। फिल्म में दर्द, इंतजार और इंसानी भावनाओं को बेहद शांत लेकिन प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है।

जब यह फिल्म रिलीज हुई थी, तब इसे दुनियाभर के फिल्म समारोहों में काफी सराहना मिली थी। अब दशकों बाद Cannes Film Festival में इसके प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि अच्छी कहानियां समय के साथ पुरानी नहीं होतीं। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, सादगी और भावनात्मक गहराई आज भी दर्शकों को उतना ही प्रभावित करती है जितना अपने दौर में करती थी।

भारतीय सिनेमा के लिए यह गर्व की बात मानी जा रही है कि एक पुरानी मलयालम फिल्म आज भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाए हुए है। यह दर्शाता है कि भारतीय रीजनल सिनेमा में हमेशा से ऐसी कहानियां मौजूद रही हैं, जो भाषा और समय की सीमाओं से परे जाकर सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचती हैं।

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