भागलपुर : बिहार के सीमांचल इलाके की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद पूरे इलाके में आवागमन व्यवस्था चरमरा गई है। पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद होने से भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और आसपास के जिलों का सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका असर अब आम जनजीवन से लेकर व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी सामानों की सप्लाई तक साफ दिखाई देने लगा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोग अब नाव और छोटे जहाजों के सहारे गंगा नदी पार करने को मजबूर हैं। खासकर रोजाना नौकरी, इलाज, व्यापार और पढ़ाई के लिए आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुल बंद होने के कारण लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे लोगों का समय और पैसा दोनों अधिक खर्च हो रहा है।
व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप
विक्रमशिला सेतु के बंद होने का सबसे ज्यादा असर सीमांचल की व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा है। भागलपुर से सीमांचल क्षेत्र में रोजाना बड़ी मात्रा में खाद्यान्न, सब्जियां, दवाइयां, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई होती है। लेकिन पुल पर परिचालन बंद होने के बाद ट्रकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कई आवश्यक सामान समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे बाजार में परेशानी बढ़ने लगी है। वहीं ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रशासन ने दिखाई तत्परता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करने की दिशा में तेजी दिखाई है। भागलपुर के जिलाधिकारी के प्रयास से कोलकाता से चार बड़े मालवाहक जहाज मंगाए गए हैं। इन जहाजों को तिनटंगा करारी घाट और कहलगांव घाट के बीच संचालित किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि इन जहाजों के शुरू होने से सीमांचल क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। जानकारी के अनुसार एक जहाज एक बार में लगभग 10 से 24 वाहनों को गंगा पार करा सकेगा। इससे आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकेगी।
कोलकाता की शिपिंग कंपनी ने किया निरीक्षण
मालवाहक सेवा शुरू करने की तैयारी को लेकर कोलकाता की Shark Shipping Company की टीम भागलपुर पहुंची। कंपनी के डायरेक्टर मोहम्मद अरशद और तनवीर हसन ने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ गंगा घाटों का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान घाट की स्थिति, जलस्तर, जहाज संचालन की संभावनाएं, सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की लोडिंग-अनलोडिंग व्यवस्था का जायजा लिया गया। इस दौरान अंचल नाजीर ललन कुमार समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
टीम ने यह भी देखा कि किन घाटों से बड़े वाहनों को आसानी से जहाज पर चढ़ाया और उतारा जा सकता है। प्रशासन फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के तहत जल्द सेवा शुरू करने की तैयारी में जुटा हुआ है।
मरीजों और छात्रों की बढ़ी परेशानी
पुल बंद होने का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। सीमांचल क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए भागलपुर आते हैं। वहीं हजारों छात्र-छात्राएं भी रोजाना शिक्षा के लिए सफर करते हैं। पुल बंद होने के बाद इन लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
कई मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत हो रही है, जबकि छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को घंटों अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द वैकल्पिक व्यवस्था पूरी तरह शुरू नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रशासन की चुनौती और लोगों की उम्मीद
फिलहाल जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमांचल क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को जल्द सामान्य करना है। मालवाहक जहाज सेवा शुरू होने से लोगों को अस्थायी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और परिचालन बहाल होने तक परेशानी बनी रह सकती है।
हालांकि प्रशासन का दावा है कि वैकल्पिक व्यवस्था को तेजी से लागू किया जा रहा है ताकि आम लोगों, व्यापारियों और यात्रियों को कम से कम परेशानी हो। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह नई व्यवस्था कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से शुरू हो पाती है।







