Tuesday, June 23, 2026
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बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का आंदोलन तेज, दूसरे दिन भी ठप रहा कामकाज

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वेतन विसंगति, पदोन्नति और स्थायीकरण की मांग को लेकर आंदोलन जारी, जुलाई में विधानमंडल घेराव की चेतावनी

पटना, 19 मई 2026:
बिहार के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों के समर्थन में चलाया जा रहा कलमबंद आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन के कारण राज्य के सभी परम्परागत विश्वविद्यालयों एवं लगभग 250 अंगीभूत महाविद्यालयों में प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे। राज्यभर के करीब 33 हजार शिक्षकेत्तर कर्मचारी आंदोलन में शामिल होकर सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं।

आंदोलन का असर विश्वविद्यालयों के दैनिक कार्यों पर साफ दिखाई दिया। नामांकन, परीक्षा फॉर्म, प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया, वेतन भुगतान, पेंशन संबंधी कार्य सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य बाधित रहे। कई विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

महासंघ के अध्यक्ष वेंकटेश कुमार, महामंत्री रोहित कुमार, विनोद कुमार, दीपक कुमार, त्रिपुरारी प्रसाद एवं संजीव कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की विभिन्न मांगें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि लगातार उपेक्षा और आर्थिक असमानता के कारण कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

महासंघ के अनुसार कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:

  • वेतन विसंगति का समाधान
  • समय पर पदोन्नति
  • दैनिक वेतनभोगी एवं संविदा कर्मियों का स्थायीकरण
  • रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति
  • सेवा शर्तों में सुधार एवं अन्य सुविधाएं

महासंघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति की जा रही है, जबकि संबंधित महाविद्यालयों में पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी है। ऐसे में पुराने कॉलेजों का कार्य संचालन और अधिक प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शीघ्र नियमित बहाली की जाए। साथ ही अनुभवी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अनुबंध के आधार पर नियुक्त कर कार्य व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए।

आंदोलन का अगला चरण

महासंघ ने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा करते हुए बताया कि:

  • 20 मई 2026 को विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर कुलपति के समक्ष व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
  • जुलाई 2026 में बिहार विधानमंडल के समक्ष विशाल धरना आयोजित होगा।
  • अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

महासंघ के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

इधर आंदोलन को लेकर छात्र संगठनों एवं अभिभावकों की चिंता भी बढ़ने लगी है। लगातार कामकाज ठप रहने से परीक्षा, रिजल्ट और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब सभी की निगाहें सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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