Monday, July 6, 2026
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किसानों के लिए खुशखबरी! गन्ने से ऐसे बन रहा है ग्रीन फ्यूल

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पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण की समस्या के बीच अब इथेनॉल देश के लिए एक बड़ा विकल्प बनकर उभर रहा है। केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रही है, ताकि विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो और किसानों की आय बढ़ सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर 1 टन गन्ने से कितना इथेनॉल तैयार होता है और यह ग्रीन फ्यूल कैसे बनता है?

1 टन गन्ने से कितना इथेनॉल निकलता है?

विशेषज्ञों के अनुसार,

  • 1 टन गन्ने (1000 किलोग्राम) से औसतन 65 से 75 लीटर इथेनॉल तैयार किया जा सकता है।
  • यह मात्रा गन्ने की गुणवत्ता, शुगर रिकवरी और प्रोसेसिंग तकनीक पर निर्भर करती है।

अगर इथेनॉल सीधे गन्ने के रस से बनाया जाए तो उत्पादन अधिक होता है, जबकि शीरा (Molasses) से बनने पर मात्रा थोड़ी कम हो सकती है।

आखिर इथेनॉल होता क्या है?

इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल आधारित जैव ईंधन (Bio Fuel) है, जिसे गन्ना, मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर वाहन चलाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे “ग्रीन फ्यूल” कहा जाता है, क्योंकि इससे प्रदूषण कम होता है।

कैसे तैयार होता है इथेनॉल?

इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है—

1. गन्ने की पेराई

सबसे पहले चीनी मिलों में गन्ने की पेराई की जाती है और उसका रस निकाला जाता है।

2. शीरा (Molasses) तैयार होना

चीनी बनाने के बाद बचा गाढ़ा तरल पदार्थ शीरा कहलाता है। यही इथेनॉल उत्पादन का मुख्य आधार होता है।

3. फर्मेंटेशन प्रक्रिया

शीरे या गन्ने के रस में यीस्ट मिलाकर उसे फर्मेंट किया जाता है। इस प्रक्रिया में शुगर अल्कोहल में बदल जाती है।

4. डिस्टिलेशन

इसके बाद मिश्रण को गर्म कर शुद्ध इथेनॉल अलग किया जाता है।

5. ब्लेंडिंग

तैयार इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जाता है। भारत में फिलहाल E20 यानी 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों को कैसे होगा फायदा?

इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना किसानों को कई बड़े फायदे मिल रहे हैं—

  • चीनी मिलों का भुगतान तेज होता है
  • गन्ने की मांग बढ़ती है
  • किसानों की आय में वृद्धि होती है
  • पेट्रोल आयात पर देश का खर्च कम होता है

पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है इथेनॉल?

इथेनॉल से चलने वाले ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इससे—

  • वायु प्रदूषण घटता है
  • ग्रीनहाउस गैसों में कमी आती है
  • पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है

भारत का बड़ा लक्ष्य

भारत सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाना है। इससे देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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