पटना: बिहार में रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में होने वाला पलायन लंबे समय से बड़ा सामाजिक और आर्थिक मुद्दा रहा है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की तलाश में बड़ी संख्या में लोग हर साल दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और दक्षिण भारत के कई शहरों में बिहार से गए कामगार बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पलायन को लेकर बड़ा दावा किया है।
एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान जब मुख्यमंत्री से बिहार से होने वाले पलायन को रोकने की योजना को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने भविष्य का लक्ष्य बताते हुए कहा कि 2030 से पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, आने वाले वर्षों में राज्य का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाएगा, संस्थानों का विकास होगा और बच्चों की पढ़ाई से लेकर युवाओं के रोजगार तक के अवसर बिहार में ही उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
2030 तक बिहार की तस्वीर बदलने का दावा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास को लेकर वर्ष 2030 तक की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव होंगे।
सरकार का लक्ष्य ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां लोगों को बेहतर भविष्य के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। बच्चों को बेहतर शिक्षा, युवाओं को रोजगार और लोगों को जरूरी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने पर जोर देने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
यदि स्थानीय स्तर पर शिक्षा, रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ते हैं तो इससे रोजगार आधारित पलायन के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
गांवों की बदलेगी सूरत, नए शहर होंगे विकसित
मुख्यमंत्री ने बिहार के विकास की चर्चा करते हुए गांवों और शहरों को लेकर भी अपनी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिहार में नए शहर विकसित होंगे और गांवों को भी व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाएगा।
गांवों में सड़क, आवागमन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ वहां के वातावरण और जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
सरकार की कोशिश बड़े शहरों के साथ-साथ ग्रामीण बिहार को भी आधुनिक और सुविधासंपन्न बनाने की है। यदि इन योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इसका असर स्थानीय रोजगार और पलायन दोनों पर पड़ सकता है।
पढ़ाई से नौकरी तक बिहार में अवसर देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार को पलायन रोकने की अहम कड़ी बताया। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर युवाओं के रोजगार तक की व्यवस्था बिहार में ही विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसके तहत बेहतर शिक्षण संस्थानों, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने पर जोर दिया जाएगा। उद्देश्य यह है कि बिहार के युवाओं को उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की मजबूरी कम हो।
आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर
सम्राट चौधरी ने बिहार के आर्थिक विकास को लेकर भी उम्मीद जताई। उनका कहना है कि जैसे-जैसे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, नए शहर विकसित होंगे, संस्थानों का विस्तार होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे बिहार की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
बिहार से होने वाला पलायन केवल रोजगार से जुड़ा मुद्दा नहीं है। इसका प्रभाव परिवारों, गांवों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर भी पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर रोजगार और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना पलायन के दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अब सवाल- क्या 2030 तक पूरा होगा लक्ष्य?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दावा काफी बड़ा है कि 2030 से पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। अब असली चुनौती इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने की होगी।
आने वाले वर्षों में रोजगार, उद्योग, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सरकार की योजनाएं कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
यदि बिहार में पढ़ाई से लेकर रोजगार तक पर्याप्त अवसर विकसित होते हैं, नए शहरों के साथ गांवों में भी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होता है और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ने और पलायन का दबाव कम होने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल 2030 की डेडलाइन को लेकर मुख्यमंत्री के इस बयान ने बिहार में पलायन और विकास की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले वर्षों में यह लक्ष्य किस हद तक जमीन पर उतरता है।







