Monday, July 6, 2026
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वट सावित्री व्रत 2026 : अखंड सौभाग्य, प्रेम और समर्पण का महापर्व, श्रद्धा में डूबा बिहार

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पटना : भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाने वाला वट सावित्री व्रत इस वर्ष पूरे श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। बिहार सहित देशभर में सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिरों, वट वृक्षों (बरगद के पेड़) और पूजा स्थलों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखने को मिली।महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी नजर आईं। लाल, पीली और हरी साड़ियों में श्रृंगार किए महिलाओं ने हाथों में पूजा की थाली, फल, फूल, धूप, दीप, सिंदूर, भीगा चना और मिठाई लेकर वट वृक्ष की पूजा की। पूजा के दौरान महिलाओं ने बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा लपेटते हुए अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना की।

सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है यह पर्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत माता सावित्री और सत्यवान की कथा से हुई। कहा जाता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लेकर अपने पतिव्रता धर्म, तपस्या और अटूट प्रेम का परिचय दिया था। सावित्री की दृढ़ निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन प्रदान किया। तभी से यह व्रत महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और पति की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

धर्माचार्यों का कहना है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। बरगद का वृक्ष दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए महिलाएं इस वृक्ष की पूजा कर अपने परिवार की खुशहाली और स्थिरता की कामना करती हैं।

बिहार के कई जिलों में दिखा विशेष उत्साह

पटना, समस्तीपुर, दरभंगा, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और छपरा समेत कई जिलों में वट सावित्री पूजा को लेकर खास उत्साह देखा गया। कई जगहों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की और पारंपरिक लोकगीत गाए। मंदिरों के आसपास मेले जैसा माहौल देखने को मिला। पूजा स्थलों पर सुबह से ही महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मिट्टी के दीपक जलाए और कथा सुनने के बाद पूजा संपन्न की। वहीं शहरों में भी आधुनिक जीवनशैली के बीच यह पर्व पूरे पारंपरिक स्वरूप में मनाया गया।

पूजा की प्रमुख सामग्री

  • वट वृक्ष (बरगद का पेड़)
  • कच्चा सूत या धागा
  • सिंदूर और चूड़ी
  • फल और मिठाई
  • भीगा हुआ चना
  • धूप, दीप और अगरबत्ती
  • पूजा की थाली और जल

सोशल मीडिया पर भी दिखी पर्व की धूम

वट सावित्री व्रत को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पूजा की तस्वीरें और वीडियो साझा कर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर “अखंड सौभाग्य” और “पति की लंबी उम्र” की कामनाओं वाले संदेश खूब वायरल हुए।

महिलाओं ने क्या कहा

कई महिलाओं ने बताया कि यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। महिलाओं का कहना था कि बदलते समय के बावजूद भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखने में ऐसे पर्वों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वट सावित्री व्रत का महत्व

  • पति की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना
  • वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम
  • परिवार की समृद्धि और खुशहाली
  • अखंड सौभाग्य और धार्मिक आस्था का प्रतीक
  • भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत स्वरूप

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया वट सावित्री व्रत परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है। यही कारण है कि यह पर्व हर वर्ष महिलाओं के बीच विशेष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

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