Wednesday, September 23, 2026
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बिहार पंचायत चुनाव से पहले बड़ा बदलाव! 8 हजार से बढ़कर 13 हजार हो सकती हैं ग्राम पंचायतें, बढ़ेंगे मुखिया-सरपंच के पद

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पटना: बिहार में अगले पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों की तस्वीर बदलने की तैयारी है। आगामी चुनाव से पहले राज्य की ग्राम पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जाना है। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायतों की संख्या में बड़ा इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। इसका सीधा असर मुखिया, सरपंच और ग्राम कचहरी से जुड़े पदों पर भी पड़ेगा।

मौजूदा समय में बिहार में करीब 8,053 ग्राम पंचायतें हैं। प्रस्तावित परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना है। यदि यह बदलाव होता है तो राज्य में लगभग 5 हजार नई पंचायतें बन सकती हैं। इसके साथ ही पंचायत चुनाव में दावेदारी करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ सकती है।

मुखिया के करीब 4 हजार पद बढ़ने की संभावना

ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़ने का सबसे सीधा असर मुखिया के पदों पर पड़ेगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए एक मुखिया का पद होता है। ऐसे में पंचायतों की संख्या बढ़ने पर मुखिया के पद भी उसी अनुपात में बढ़ेंगे। अनुमान के मुताबिक करीब 60 फीसदी तक पद बढ़ सकते हैं।

अधिक आबादी वाले पंचायत क्षेत्रों को जनसंख्या और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर अलग-अलग पंचायतों में बांटा जा सकता है। इससे कई गांवों की मौजूदा पंचायत सीमा बदलने की संभावना है।

सरपंच और ग्राम कचहरी पर भी असर

परिसीमन के बाद केवल मुखिया ही नहीं, बल्कि सरपंच और ग्राम कचहरी से जुड़े पदों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती है। नई पंचायतों के गठन के साथ कई गांव नई पंचायतों का हिस्सा बन सकते हैं। इससे पंचायतों का भौगोलिक और राजनीतिक स्वरूप भी बदल सकता है।

2011 की जनगणना बनेगी आधार

पंचायतों के पुनर्गठन में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाए जाने की बात सामने आ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में करीब 7 हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत और लगभग 500 की आबादी पर एक वार्ड निर्धारित करने का प्रावधान बताया जा रहा है। हालांकि अंतिम सीमा और संख्या आधिकारिक परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

आरक्षण का समीकरण भी बदलेगा

नई पंचायतों के गठन के साथ आरक्षण व्यवस्था में भी बदलाव की संभावना है। पिछले चुनाव में किसी पंचायत या पद के लिए जो आरक्षण लागू था, जरूरी नहीं कि अगले चुनाव में भी वही व्यवस्था रहे। परिसीमन पूरा होने के बाद नई पंचायत और वार्ड संरचना के आधार पर आरक्षण चक्र निर्धारित किया जा सकता है।

इस बदलाव का असर उन संभावित उम्मीदवारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। कई उम्मीदवारों की पंचायत या वार्ड बदल सकता है और आरक्षण बदलने से उनकी चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है।

परिसीमन के बाद तय होगा चुनाव कार्यक्रम

फिलहाल पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होगी, इसके बाद आरक्षण समेत अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी और फिर चुनाव कार्यक्रम पर निर्णय लिया जाएगा।

अगर पंचायतों की संख्या करीब 8 हजार से बढ़कर 13 हजार के आसपास पहुंचती है, तो बिहार के ग्रामीण राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब निगाह परिसीमन की अंतिम सूची पर है, जिसके बाद यह साफ होगा कि किस जिले में कितनी नई पंचायतें बनती हैं और किन गांवों की सीमाओं में बदलाव होता है।

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