अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर चढ़ावा (दान) में कथित गड़बड़ी के मामले के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए कृष्ण मोहन को नई जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया। यह फैसला ट्रस्ट की अहम बैठक में लिया गया, जिस पर पूरे देश की नजर थी।
कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने क्या कहा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने स्पष्ट किया कि एक बार इस्तीफा सौंपे जाने के बाद उसे स्वीकार या अस्वीकार करना व्यक्तिगत निर्णय का विषय नहीं रह जाता। उन्होंने कहा:
“एक बार इस्तीफा सौंपे जाने के बाद, उसे स्वीकार करने या अस्वीकार करने का फैसला हमारे हाथ में नहीं था। हमें बस उसे स्वीकार करना था।”
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट वित्तीय पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और दान राशि की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता की आवश्यकता नहीं है।
क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
हाल के दिनों में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोपों के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद चंपत राय ने “नैतिक जिम्मेदारी” लेते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया था। अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया था। मामले की जांच जारी है और विशेष जांच दल (SIT) इसकी पड़ताल कर रहा है।
कृष्ण मोहन को मिली नई जिम्मेदारी
ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए कृष्ण मोहन को नई जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही ट्रस्ट ने भविष्य में वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के संकेत दिए हैं।
आगे क्या?
ट्रस्ट की बैठक में दान विवाद की जांच, प्रशासनिक सुधार और भविष्य की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा हुई। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर की व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रहेगी और श्रद्धालुओं के हित सर्वोपरि रहेंगे।







