कैमूर News: बिहार के कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड स्थित नसेज गांव में पिछले 7 से 8 वर्षों से जलजमाव की समस्या लोगों के लिए अभिशाप बन गई है। करीब 400 परिवार गंदे और बदबूदार पानी के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। गांव की मुख्य सड़कें और गलियां जलमग्न रहने के कारण लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
सड़कें बनीं तालाब, घरों से निकलना हुआ मुश्किल
गांव की अधिकांश गलियां गंदे पानी से लबालब भरी हुई हैं। हालत यह है कि लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी पानी से होकर गुजरना पड़ता है। स्कूली बच्चों को स्कूल जाने, महिलाओं को बाजार पहुंचने और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कई जगहों पर पानी इतना भर जाता है कि सड़क और नाली का अंतर समझना मुश्किल हो जाता है, जिससे हादसे का खतरा भी बना रहता है।
बीमार पड़ने पर चारपाई से ले जाना पड़ता है मरीज
ग्रामीण राम अवध सिंह और राम अवतार सिंह ने बताया कि यदि गांव में कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। गांव में वाहन प्रवेश नहीं कर पाते, इसलिए मरीजों को चारपाई या कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।
4 साल से अधूरा पड़ा नाली निर्माण
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नाली निर्माण का कार्य पिछले चार वर्षों से बेहद धीमी गति से चल रहा है। कई हिस्सों में नाली अधूरी पड़ी है, जबकि जहां निर्माण हुआ है वहां भी जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि केवल कागजी कार्रवाई कर विकास कार्य पूरे होने का दावा किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
जल निकासी के लिए सरकारी जमीन का उपयोग नहीं
ग्रामीणों के अनुसार गांव के उत्तर दिशा में स्थित ‘भागड़ गड़ही’ नामक सरकारी जमीन तक पानी की निकासी का रास्ता बनाया जाए तो जलजमाव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसी कारण गांव का गंदा पानी गलियों और सड़कों पर जमा रहता है।
संक्रमण और बीमारियों का बढ़ा खतरा
गंदे पानी के कारण गांव में मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों को डेंगू, मलेरिया, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों का डर सताता रहता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ रहा है। बदबू और गंदगी के कारण लोगों का घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, अधूरे नाली निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराया जाए और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि विकास के दावे तभी सार्थक होंगे, जब गांव के लोगों को गंदे पानी से मुक्ति मिले और सामान्य जीवन जीने का अधिकार मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल नसेज गांव के सैकड़ों परिवार प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि आखिर कब उन्हें इस आठ साल पुराने जलजमाव के संकट से राहत मिलेगी।







