Wednesday, July 15, 2026
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मैथिली भाषा को CBSE पाठ्यक्रम में मिली जगह, मिथिलांचल में खुशी की लहर

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सांसद की पहल को मुख्यमंत्री ने सराहा, लोगों ने जताया आभार

बेनीपट्टी / दरभंगा:
मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और हजारों वर्षों पुरानी भाषा परंपरा को एक बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली है। केंद्र सरकार द्वारा मैथिली भाषा को सीबीएसई (CBSE) पाठ्यक्रम की सूची में शामिल किए जाने के बाद पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में खुशी, उत्साह और गर्व का माहौल है। इस ऐतिहासिक फैसले को लोग मिथिला की संस्कृति, साहित्य और भाषा के सम्मान के रूप में देख रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से मैथिली भाषा को राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान दिलाने की मांग उठती रही थी। आखिरकार यह सपना अब साकार हुआ है। इस फैसले से न केवल मिथिला क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में अध्ययन का अवसर मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी मजबूत रूप से जुड़ सकेगी।

इस निर्णय पर बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैथिली भाषा को सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इसे बिहार और मिथिलांचल के लिए गर्व का विषय बताया।

वहीं दरभंगा के सांसद Gopal Ji Thakur की इस मुद्दे पर लगातार की गई पहल और प्रयासों की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि सांसद ने संसद से लेकर केंद्र सरकार तक लगातार मैथिली भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने की आवाज उठाई। इसी का परिणाम है कि आज मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में नई पहचान मिली है।

पाली पंचायत समेत आसपास के क्षेत्रों में इस निर्णय को लेकर लोगों ने खुशी जाहिर की। सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और कलाकारों ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
सर्वश्री उग्रेश झा, गणेश मिश्र, मनोज मधु, डॉ. सजल, लोक गायिका Bhavya Rani, डॉ. भव नाथ झा, कलानाथ झा, कीर्ति कुमार झा, शिव कुमार झा तथा स्थानीय पत्रकारों ने संयुक्त रूप से इस कार्य में योगदान देने वाले सभी महानुभावों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

उन्होंने कहा कि मैथिली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि मिथिला की आत्मा है। यह भाषा साहित्य, संगीत, लोकसंस्कृति और परंपराओं की धरोहर है। अब जब इसे सीबीएसई पाठ्यक्रम में स्थान मिला है, तो इससे देशभर में मैथिली भाषा को नई पहचान और सम्मान मिलेगा।

स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस फैसले से आने वाले समय में मैथिली साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा मिलेगी। साथ ही मिथिलांचल के विद्यार्थियों के लिए रोजगार और शैक्षणिक अवसरों के नए रास्ते खुलेंगे।

क्षेत्र में कई जगहों पर लोगों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की तथा इसे मिथिला के गौरव का ऐतिहासिक क्षण बताया।

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