Wednesday, July 15, 2026
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होर्मुज संकट से दुनिया में हड़कंप! 200 डॉलर तक पहुंच सकता है कच्चा तेल, भारत में महंगाई और ईंधन संकट का बड़ा खतरा

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मध्य पूर्व में जारी तनाव अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बनता जा रहा है। दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन माने जाने वाले “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” (Strait of Hormuz) को लेकर नई चेतावनी सामने आई है। ग्लोबल एनर्जी रिसर्च कंपनियों और मार्केट एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि अगर होर्मुज लंबे समय तक पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

आखिर क्यों इतना अहम है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। खाड़ी देशों—सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर—से निकलने वाला ज्यादातर तेल इसी रास्ते से एशिया और यूरोप पहुंचता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो दुनिया को 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट झेलना पड़ सकता है।

200 डॉलर तक कैसे पहुंच सकता है तेल?

ऑस्ट्रेलियाई इन्वेस्टमेंट बैंक Macquarie Group और कई एनर्जी एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष और सप्लाई संकट जून के बाद भी जारी रहा, तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।

Wood Mackenzie की रिपोर्ट में तीन संभावित स्थितियों का जिक्र किया गया है। सबसे खतरनाक स्थिति वह मानी जा रही है जिसमें 2026 के अंत तक होर्मुज पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित होगी और बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और इनकी सप्लाई का प्रमुख रास्ता होर्मुज ही है। अनुमान है कि भारत के करीब आधे तेल आयात इसी मार्ग से होकर आते हैं।

अगर तेल की कीमतें 150 से 200 डॉलर तक पहुंचती हैं, तो भारत में कई बड़े असर देखने को मिल सकते हैं—

  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
  • LPG सिलेंडर महंगे होने की आशंका
  • ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई का खर्च बढ़ना
  • खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की चीजों में महंगाई
  • रुपये पर दबाव और डॉलर के मुकाबले कमजोरी
  • शेयर बाजार में गिरावट और आर्थिक सुस्ती

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत की महंगाई पर सीधा असर डालती है। अगर तेल 200 डॉलर के करीब पहुंचा तो देश में “स्टैगफ्लेशन” जैसी स्थिति बन सकती है, जहां महंगाई बढ़ेगी लेकिन आर्थिक विकास धीमा पड़ जाएगा।

भारत सरकार भी अलर्ट मोड में

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे जहाजों और ऊर्जा सप्लाई पर नजर बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई भारतीय जहाज अभी भी संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे हुए हैं और सरकार सुरक्षित हालात बनने का इंतजार कर रही है।

भारत वैकल्पिक सप्लाई के तौर पर रूस, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से तेल खरीद बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, इन विकल्पों में ज्यादा समय, महंगा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक चुनौतियां शामिल हैं।

दुनिया भर में बढ़ी बेचैनी

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश भी इस संकट से चिंतित हैं। वैश्विक बाजारों में पहले ही अस्थिरता बढ़ चुकी है और निवेशकों में डर का माहौल है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो आने वाले महीनों में दुनिया को ईंधन संकट, महंगाई और आर्थिक झटकों का सामना करना पड़ सकता है।

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