आज की तेज रफ्तार जिंदगी, बढ़ता तनाव, देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, अनियमित खानपान और खराब लाइफस्टाइल युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रही है। एक समय था जब हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 25 से 35 साल की उम्र के युवाओं में हाई बीपी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसका सबसे खतरनाक असर उनके दिमाग यानी ब्रेन पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिमाग की छोटी-छोटी नसों को नुकसान पहुंचाता है। यही कारण है कि कई युवा कम उम्र में ही याददाश्त कमजोर होने, ध्यान भटकने, मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन और स्ट्रेस जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर हाई बीपी लंबे समय तक कंट्रोल में न रहे तो यह ब्रेन एजिंग यानी दिमाग के समय से पहले बूढ़ा होने की वजह बन सकता है।
क्यों कहा जाता है हाई बीपी को “साइलेंट किलर”?
डॉक्टरों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर अक्सर बिना किसी बड़े लक्षण के शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता रहता है। कई लोगों को सालों तक यह पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर सामान्य से काफी ज्यादा है। इसी वजह से इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हाई बीपी धीरे-धीरे दिल, किडनी और आंखों के साथ-साथ दिमाग को भी प्रभावित करता है। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने पर ब्रेन में ब्लड सप्लाई प्रभावित होने लगती है, जिससे स्ट्रोक, माइक्रो ब्लीडिंग और याददाश्त से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा हाई बीपी?
डॉक्टरों के अनुसार आज की लाइफस्टाइल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है। खासकर शहरी युवाओं में खराब दिनचर्या तेजी से हाई बीपी को बढ़ावा दे रही है।
मुख्य कारण:
- देर रात तक जागना
- मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल
- जंक फूड और ज्यादा नमक वाला खाना
- एक्सरसाइज की कमी
- लगातार मानसिक तनाव
- धूम्रपान और शराब की आदत
- कम नींद लेना
- बढ़ता मोटापा
विशेषज्ञों का कहना है कि कई युवा खुद को फिट समझते हैं क्योंकि वे बाहर से स्वस्थ दिखाई देते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उनका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका होता है।
ब्रेन पर कैसे पड़ता है असर?
न्यूरोलॉजिस्ट्स के अनुसार हाई बीपी दिमाग की नसों पर लगातार दबाव बनाता है। इससे ब्रेन सेल्स को ऑक्सीजन और पोषण सही तरीके से नहीं मिल पाता। धीरे-धीरे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।
इसके कुछ सामान्य लक्षण:
- बार-बार भूलना
- काम में फोकस न कर पाना
- सिरदर्द और भारीपन
- जल्दी गुस्सा आना
- मानसिक थकावट
- नींद की समस्या
- तनाव और एंग्जायटी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
डॉक्टरों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं को नियमित हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दी है। उनका कहना है कि 25 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराना चाहिए।
हाई बीपी से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें:
- रोज कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें
- नमक और जंक फूड कम खाएं
- पर्याप्त नींद लें
- तनाव कम करें
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
- ज्यादा पानी पिएं
- स्क्रीन टाइम सीमित करें
- नियमित योग और मेडिटेशन करें
डॉक्टरों का मानना है कि सही लाइफस्टाइल अपनाकर हाई बीपी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। समय रहते सावधानी बरतने से न केवल दिल बल्कि दिमाग को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।







