Monday, July 6, 2026
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के फैसले से बढ़ा पुलिस का मनोबल

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“अपराधियों पर सख्ती जरूरी”, खुली छूट के फैसले का कई लोगों ने किया समर्थन

पटना | नवीन कुमार
Samrat Choudhary द्वारा बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस प्रशासन को खुली छूट दिए जाने के फैसले की चर्चा पूरे प्रदेश में तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख के बाद जहां बिहार पुलिस का मनोबल बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के बीच भय का माहौल बनने की बात कही जा रही है।

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री लगातार राज्य की विधि व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं और उन्होंने पुलिस प्रशासन को कानून के दायरे में रहकर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद कई अपराधी छिपने को मजबूर बताए जा रहे हैं।


“बिहार में यूपी जैसी सख्ती जरूरी”

प्रख्यात सामाजिक चिंतक पं. Mahesh Kant Jha ने मुख्यमंत्री के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि बिहार के हित में कठोर कानून व्यवस्था बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा:

“उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में भी सख्त पुलिस व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि महिलाएं बेझिझक कहीं भी आ-जा सकें और आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस करे।”

उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस कदम के लिए साधुवाद देते हुए कहा कि मजबूत पुलिस व्यवस्था से जनता का शासन पर भरोसा बढ़ता है।


शिक्षाविदों ने भी किया समर्थन

प्रबुद्ध शिक्षाविद् डॉ. Kumud Verma ने कहा कि हाल के दिनों में बिहार की विधि व्यवस्था में सुधार देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि अपराधियों के मन में कानून का भय होना जरूरी है, क्योंकि इससे आम जनता राहत महसूस करती है। साथ ही उन्होंने स्पीडी ट्रायल के जरिए अपराधियों को जल्द सजा दिलाने पर जोर दिया।


विधायक रत्नेश कुशवाहा ने भी सराहा फैसला

विधायक Ratnesh Kushwaha ने भी मुख्यमंत्री के फैसले को बिहार के हित में बताया।

उन्होंने कहा कि पुलिस को कानून के तहत स्वतंत्र कार्रवाई की छूट मिलने से अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी और प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।


अपराधियों में बढ़ा डर, जनता में राहत

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि सरकार के इस फैसले से अपराधियों के बीच भय का माहौल बना है। वहीं आम लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह सख्ती जारी रही तो बिहार में कानून व्यवस्था और मजबूत हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि त्वरित न्याय और प्रशासनिक पारदर्शिता भी राज्य में स्थायी कानून व्यवस्था के लिए जरूरी होगी।

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