लखनऊ | विराट कृष्ण की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को हलचल तेज रही। राजधानी Lucknow की सड़कों पर नेताओं और समर्थकों की चहल-पहल देखने को मिली। मौका था Yogi Adityanath सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार का, जिसे राजनीतिक विश्लेषक आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी के रूप में देख रहे हैं।
सरकार विस्तार के दौरान आठ नेताओं ने मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस विस्तार को भाजपा की चुनावी रणनीति और सामाजिक-सियासी समीकरण साधने की कोशिश माना जा रहा है।
नए चेहरों और पुराने नेताओं के कद में बढ़ोतरी
मंत्रिमंडल विस्तार में कई नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी गईं, जबकि कुछ मंत्रियों के कद को बढ़ाते हुए उन्हें कैबिनेट स्तर पर जगह दी गई।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार किया है।
मंत्री पद की शपथ लेने वाले नेताओं में अजीत सिंह पाल, एस. तोमर, कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, कैलाश सिंह राजपूत और हंसराज जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं भूपेंद्र सिंह चौधरी और मनोज पांडे को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने से राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
“जनहित योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाएंगे”
नए मंत्रियों ने शपथ के बाद दावा किया कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी।
मंत्रियों का कहना है कि शेष बचे कार्यकाल में विकास योजनाओं को तेज गति से लागू किया जाएगा ताकि जनता को सीधा लाभ मिल सके।
भाजपा नेताओं का दावा है कि राज्य में विकास, कानून व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर सरकार मजबूत स्थिति में है और जनता एक बार फिर भाजपा को समर्थन देगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
वहीं विपक्षी दलों ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
Samajwadi Party सहित कई विपक्षी दलों का कहना है कि मंत्रियों को जिम्मेदारी देने में काफी देरी की गई है और यह विस्तार केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार अब चुनाव को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है।
चुनावी मोड में दिख रही सरकार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब पूरी तरह चुनावी मोड में दिखाई दे रहे हैं।
सरकार की ओर से लगातार संगठन, प्रशासन और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में भाजपा राज्य में अपने विकास कार्यों, कानून व्यवस्था और हिंदुत्व की राजनीति को प्रमुख मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में उतर सकती है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश का यह मंत्रिमंडल विस्तार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।







