कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों तक वामपंथ और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व वाले बंगाल में अब भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सत्ता का रास्ता साफ कर लिया है। प्रचंड बहुमत मिलने के बाद अब सरकार गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि सुवेंदु अधिकारी को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा आलाकमान सुवेंदु अधिकारी के नाम पर लगभग सहमत माना जा रहा है और अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। साथ ही यह भी चर्चा है कि भाजपा बंगाल में डिप्टी मुख्यमंत्री का पद नहीं बनाएगी। इसे पार्टी की तरफ से सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व पर मजबूत भरोसे और सत्ता के केंद्रीकृत संचालन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव बाद हिंसा से गरमाया माहौल
चुनाव परिणाम आने के बाद बंगाल के कई इलाकों से हिंसा और राजनीतिक टकराव की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है। भाजपा नेताओं ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
राज्य में नई सरकार बनने से पहले ही सुरक्षा और राजनीतिक तनाव बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा अब कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
विधायक दल की बैठक में लग सकती है अंतिम मुहर
भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को कोलकाता में होने जा रही है। इस बैठक में विधायक दल के नेता का चुनाव किया जाएगा, जिसे मुख्यमंत्री पद की अंतिम मंजूरी माना जा रहा है।
इस अहम बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मौजूद रहेंगे। चुनावी जीत के बाद अमित शाह पहली बार बंगाल पहुंच रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अमित शाह बैठक से पहले राज्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग से रणनीतिक चर्चा भी करेंगे। शाम चार बजे नवनिर्वाचित विधायकों के साथ औपचारिक बैठक होगी, जहां मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।
नए और पुराने चेहरों का संतुलन
भाजपा का संभावित मंत्रिमंडल अनुभवी नेताओं और नए चेहरों का मिश्रण हो सकता है। पार्टी इस बार सरकार और संगठन दोनों में वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहली बार विधायक बनीं रत्ना देबनाथ का नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में है। वह आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले की पीड़िता की मां हैं। इसके अलावा भारत सेवाश्रम संघ से जुड़े उत्पल महाराज, पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व एनएसजी कमांडो दिपांजन चक्रवर्ती के नाम भी संभावित मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इन चेहरों के जरिए भावनात्मक और सामाजिक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष और महिला नेतृत्व पर भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार माणिकतला से विधायक तपस रॉय को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं पार्टी महिला नेतृत्व को भी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। कुछ रिपोर्ट्स में महिला विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा भी सामने आई है, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
RSS और भाजपा के बीच समन्वय पर जोर
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच हाल में हुई बैठकों में वैचारिक एकरूपता और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष जोर दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े नेताओं को सरकार और संगठन में अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में मजबूत वैचारिक आधार और जमीनी संगठन दोनों की जरूरत होगी।
बंगाल की राजनीति में नया अध्याय
यदि सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले राज्य में भाजपा की सरकार बनना राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब पूरे देश की नजर भाजपा विधायक दल की बैठक और मुख्यमंत्री के औपचारिक ऐलान पर टिकी हुई है।







