Friday, July 3, 2026
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दिल्ली में देश का पहला अंडरग्राउंड CBRN (Chemical, Biological, Radiological & Nuclear) कमांड सेंटर बनाया जाएगा। जानिए इसकी खासियत, लागत, सुरक्षा तकनीक और 25 साल की मास्टर प्लान।

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नई दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से बचाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली सरकार राजधानी में देश का पहला अंडरग्राउंड CBRN (Chemical, Biological, Radiological and Nuclear) कमांड सेंटर बनाने की तैयारी कर रही है। यह अत्याधुनिक केंद्र परमाणु हमला, रासायनिक गैस रिसाव, जैविक खतरे और रेडिएशन जैसी आपात स्थितियों के दौरान भी संचालन करने में सक्षम होगा।

यह परियोजना दिल्ली के लिए तैयार की जा रही 25 वर्षीय आपदा प्रबंधन और शहरी सुरक्षा मास्टर प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य किसी भी बड़े संकट के दौरान प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं, दमकल विभाग और आपदा राहत एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखना है।

क्या होगा CBRN कमांड सेंटर?

CBRN का अर्थ है:

  • C – Chemical (रासायनिक)
  • B – Biological (जैविक)
  • R – Radiological (रेडियोलॉजिकल)
  • N – Nuclear (परमाणु)

यह कमांड सेंटर इन चारों प्रकार के खतरों से निपटने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जाएगा।

क्या होंगी इसकी खासियतें?

इस अत्याधुनिक सुविधा में कई हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्थाएं होंगी, जिनमें शामिल हैं—

  • जमीन के कई स्तर नीचे सुरक्षित निर्माण।
  • रेडिएशन और परमाणु विस्फोट के प्रभाव को सहने वाली मजबूत संरचना।
  • विशेष एयर फिल्ट्रेशन और पॉजिटिव प्रेशर सिस्टम, जिससे जहरीली गैस या रेडियोधर्मी कण अंदर प्रवेश न कर सकें।
  • स्वतंत्र बिजली, पानी और संचार व्यवस्था।
  • 24×7 कंट्रोल रूम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम।
  • आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल तकनीक, जिससे आपदा के दौरान सभी एजेंसियों का संचालन एक ही स्थान से किया जा सके।

परमाणु युद्ध की स्थिति में कैसे करेगा काम?

विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के कमांड सेंटर को इस तरह तैयार किया जाता है कि बाहरी रेडिएशन, केमिकल गैस और जैविक संक्रमण का असर अंदर मौजूद अधिकारियों और तकनीकी टीम पर न पड़े। यदि शहर के ऊपर गंभीर संकट भी आ जाए, तब भी यहां से राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन जारी रखा जा सकता है।

हालांकि, ऐसा कोई भी बंकर पूर्ण रूप से हर प्रकार के परमाणु हमले से “अप्रभावित” रहने की गारंटी नहीं देता। इसकी वास्तविक सुरक्षा इसकी इंजीनियरिंग, निर्माण मानकों और संभावित खतरे की तीव्रता पर निर्भर करती है।

25 साल की सुरक्षा योजना का हिस्सा

दिल्ली के लिए तैयार किए जा रहे इस दीर्घकालिक सुरक्षा ब्लूप्रिंट में केवल CBRN कमांड सेंटर ही नहीं, बल्कि आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली, डिजिटल निगरानी नेटवर्क, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बेहतर समन्वय की भी योजना शामिल है।

इस परियोजना का उद्देश्य भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं, औद्योगिक दुर्घटनाओं, आतंकी हमलों और CBRN खतरों से राजधानी की सुरक्षा क्षमता को मजबूत करना है।

कब तक बनेगा?

फिलहाल यह परियोजना योजना और प्रस्ताव के चरण में है। निर्माण की समयसीमा, लागत और सटीक स्थान जैसी विस्तृत जानकारी संबंधित एजेंसियों द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और आधिकारिक मंजूरी के बाद सार्वजनिक की जाएगी।

क्यों है यह परियोजना महत्वपूर्ण?

बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, रासायनिक और जैविक खतरों की बढ़ती आशंका तथा आधुनिक युद्ध तकनीकों को देखते हुए ऐसे सुरक्षित कमांड सेंटर विकसित करना दुनिया के कई बड़े देशों की रणनीति का हिस्सा बन चुका है। दिल्ली में बनने वाला यह केंद्र भारत की आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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