पुणे से बड़ी खबर
पुणे के चर्चित लोहागढ़ फोर्ट मर्डर केस की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के बाद भी उसका मोबाइल फोन कुछ समय तक उसकी मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल के पास रहा। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस दौरान मोबाइल से महत्वपूर्ण डिजिटल सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई या कुछ डेटा जानबूझकर डिलीट किया गया।
पुलिस अब मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि फोन में मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन हिस्ट्री और अन्य डिजिटल जानकारी इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि डेटा हटाए जाने की पुष्टि होती है, तो यह आरोपियों के खिलाफ एक और महत्वपूर्ण सबूत बन सकता है।
क्या है पूरा मामला?
18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ फोर्ट पर केतन अग्रवाल की करीब 400 फीट गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे हादसा बताया गया था, लेकिन परिवार के संदेह और पुलिस जांच के बाद मामला हत्या में बदल गया।
जांच में पुलिस ने आरोप लगाया कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने पहले से साजिश रचकर केतन की हत्या की। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने केतन को फोर्ट पर बुलाया और उसे खाई में धक्का देकर घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की।
पहले भी सामने आ चुके हैं कई चौंकाने वाले खुलासे
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया है कि दोनों आरोपियों ने हत्या से पहले योजना बनाई थी, कथित तौर पर इंटरनेट पर हत्या के तरीके खोजे और घटना से पहले एक अन्य पहाड़ी पर इसकी रिहर्सल भी की थी। पुलिस ने अपराध स्थल का पुनर्निर्माण (Crime Scene Recreation) भी कराया है ताकि घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके।
मोबाइल जांच पर टिकी पुलिस की नजर
अब जांच का सबसे अहम केंद्र केतन का मोबाइल फोन बन गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
- मौत के बाद मोबाइल किसके कब्जे में था।
- फोन से कोई चैट, फोटो, वीडियो या कॉल रिकॉर्ड डिलीट किए गए या नहीं।
- क्या आरोपियों ने सबूत मिटाने या जांच को प्रभावित करने की कोशिश की।
फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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