बक्सर: धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी बक्सर में प्रसिद्ध पंचकोशी परिक्रमा मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष पांच दिवसीय पंचकोशी परिक्रमा 29 नवंबर से शुरू होगी। इस दौरान श्रद्धालु पांच अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे और पारंपरिक प्रसाद ग्रहण करेंगे। 3 दिसंबर को चरित्रवन में परिक्रमा का पांचवां और मुख्य पड़ाव होगा, जहां श्रद्धालु लिट्टी-चोखा का प्रसाद ग्रहण करेंगे। वहीं, 4 दिसंबर को बसांव मठ में संतों की विदाई के साथ आयोजन का समापन होगा।
मेले की तिथियों और तैयारियों को लेकर सोमवार को स्टेशन रोड स्थित बसांव मठ में सिद्धाश्रम व्याघ्रसर पंचकोशी परिक्रमा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बसांव पीठाधीश्वर महंत अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने की, जबकि संचालन समिति के सचिव डॉ. रामनाथ ओझा ने किया। बैठक में मेले को भव्य, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने को लेकर चर्चा हुई।
29 नवंबर को अहिरौली से शुरू होगी पंचकोशी परिक्रमा
पंचकोशी परिक्रमा की शुरुआत 29 नवंबर को अहिरौली स्थित अहिल्या मंदिर से होगी। यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के बाद पुआ-पूरी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही पांच दिवसीय धार्मिक यात्रा का शुभारंभ होगा।
परिक्रमा के दूसरे दिन यानी 30 नवंबर को श्रद्धालु नदांव स्थित नारद आश्रम पहुंचेंगे। यहां खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।
पांच पड़ावों पर मिलेगा अलग-अलग पारंपरिक प्रसाद
पंचकोशी परिक्रमा के दौरान हर पड़ाव का अपना धार्मिक और पारंपरिक महत्व है। पांचों दिनों में श्रद्धालुओं को अलग-अलग तरह का प्रसाद दिया जाता है।
पंचकोशी परिक्रमा का पूरा कार्यक्रम:
| तारीख | पड़ाव | स्थान | पारंपरिक प्रसाद |
|---|---|---|---|
| 29 नवंबर | पहला पड़ाव | अहिरौली स्थित अहिल्या मंदिर | पुआ-पूरी |
| 30 नवंबर | दूसरा पड़ाव | नदांव स्थित नारद आश्रम | खिचड़ी |
| 1 दिसंबर | तीसरा पड़ाव | भभुअर | चूड़ा-दही |
| 2 दिसंबर | चौथा पड़ाव | बड़का नुआंव | सत्तू-मूली |
| 3 दिसंबर | पांचवां और मुख्य पड़ाव | चरित्रवन | लिट्टी-चोखा |
3 दिसंबर को चरित्रवन में होगा मुख्य आयोजन
पंचकोशी परिक्रमा का पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 3 दिसंबर को चरित्रवन में आयोजित होगा। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। यहां लिट्टी-चोखा का महाप्रसाद तैयार किया जाएगा, जिसे ग्रहण करने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इसके बाद 4 दिसंबर को बसांव मठ में संतों की विदाई के साथ पंचकोशी परिक्रमा मेले का समापन होगा।
सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर जिला प्रशासन से होगी मुलाकात
बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पंचकोशी परिक्रमा में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था जरूरी है।
इन व्यवस्थाओं को लेकर समिति जल्द ही जिला प्रशासन से मुलाकात करेगी। प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मेले को सुगम और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में समिति के प्रमुख अधिवक्ता सूबेदार पांडेय, श्रीकृष्ण चौबे, संजय पाठक और मूलशंकर वर्मा सहित कई वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे।
धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक है पंचकोशी परिक्रमा
बक्सर की पंचकोशी परिक्रमा धार्मिक आस्था और प्राचीन परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। पांच दिनों तक चलने वाली इस परिक्रमा में श्रद्धालु अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और पारंपरिक प्रसाद ग्रहण करते हैं।
इस वर्ष भी आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। अब समिति और जिला प्रशासन के बीच होने वाली तैयारियों पर सबकी नजर रहेगी, ताकि पांच दिवसीय मेले को बेहतर व्यवस्था के साथ संपन्न कराया जा सके।







