Tuesday, September 8, 2026
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बिहार में बाढ़ का कहर: 12 जिलों के 70 प्रखंडों की 22.42 लाख आबादी प्रभावित

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पटना। बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोमवार सुबह तक राज्य के 12 जिलों के 70 प्रखंडों की 368 पंचायतों की करीब 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई गई है। खासकर गंगा किनारे बसे जिलों के निचले इलाकों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।

बाढ़ का असर अब केवल खेतों और ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर पानी आबादी वाले क्षेत्रों के करीब पहुंच गया है, जिससे लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव की तैयारियां की जा रही हैं।

गंगा किनारे के इलाकों में ज्यादा परेशानी

गंगा के आसपास बसे पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और लखीसराय के निचले इलाकों में बाढ़ का असर अधिक देखने को मिल रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।

निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरों में पानी घुसने और आवागमन बाधित होने की है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने पर लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

22 लाख से ज्यादा लोगों पर बाढ़ का असर

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित 12 जिलों में कुल 70 प्रखंड और 368 पंचायतें शामिल हैं। प्रभावित आबादी का आंकड़ा करीब 22.42 लाख तक पहुंच गया है।

इतनी बड़ी आबादी के प्रभावित होने से राहत व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों तक समय पर भोजन, पेयजल, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने की चुनौती है।

जिन इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है, वहां जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी भी जरूरी हो गई है।

सामुदायिक रसोई बढ़ाने की तैयारी

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था को लेकर प्रशासन सक्रिय है। प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई केंद्रों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

इन केंद्रों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित परिवारों को तैयार भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जलभराव या घरों में पानी घुसने के कारण खाना बनाने में असमर्थ परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकती है।

नदियों और तटबंधों पर लगातार निगरानी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य में प्रमुख नदियों के जलस्तर और तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। खासकर गंगा के किनारे बसे निचले इलाकों में प्रशासन की विशेष नजर है।

आने वाले घंटों में नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव बाढ़ की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से तैयारी रखना प्रशासन के लिए अहम चुनौती है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करें और तेज बहाव वाले क्षेत्रों तथा नदी के आसपास जाने से बचें।

स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील भी की जा रही है।

फिलहाल बिहार के 12 जिलों में 22 लाख से अधिक लोगों पर बाढ़ का असर बताया गया है। गंगा किनारे बसे निचले इलाकों में स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव तय करेगा कि बाढ़ का संकट कितना बढ़ता या कम होता है।

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