Wednesday, July 1, 2026
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‘पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना एक्सपेरिमेंट, अगले साल तक आएंगे नतीजे’, सुप्रीम कोर्ट में क्या बोली मोदी सरकार?

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नई दिल्ली: देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया। सरकार ने अदालत को बताया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) अभी भी एक “चल रहा प्रयोग (Ongoing Experiment)” है और इसके वास्तविक प्रभावों की स्पष्ट तस्वीर अगले वर्ष तक सामने आएगी। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया कि इससे इथेनॉल मिश्रण नीति में किसी बदलाव का संकेत नहीं लिया जाना चाहिए और E20 कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेगा।

क्या है पूरा मामला?

यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब सुप्रीम कोर्ट में Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी। यह मामला वर्ष 2025-26 के लिए इथेनॉल आवंटन से जुड़े Karnataka High Court के आदेश को चुनौती देने से संबंधित है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया था कि एक डिस्टिलरी द्वारा इथेनॉल आवंटन बढ़ाने की मांग पर विचार करने के बाद ही अंतिम टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाए। BPCL का कहना है कि यदि यह आदेश लागू रहता है तो इससे केंद्र सरकार की E20 नीति प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या बोली मोदी सरकार?

सुनवाई के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल R. Venkataramani ने अदालत से कहा,

“20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण ऐसी चीज़ है जिस पर सरकार अभी प्रयोग कर रही है। अगले साल तक इसके परिणाम हमारे सामने होंगे।”

इस बयान के बाद अदालत में मौजूद सभी पक्षों का ध्यान इस मुद्दे पर केंद्रित हो गया, क्योंकि देशभर में E20 पेट्रोल पहले से उपलब्ध कराया जा चुका है।

बयान के बाद सरकार ने दी सफाई

सुनवाई के तुरंत बाद अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि अदालत में दिए गए बयान का अर्थ यह नहीं है कि सरकार अपनी इथेनॉल नीति बदलने जा रही है।

उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण लागू करने का फैसला पूरी तरह कायम है। केवल इसके प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन जारी है। मांग, उत्पादन और उपलब्धता के आधार पर इथेनॉल की आपूर्ति कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन E20 नीति वापस लेने का कोई प्रश्न नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने BPCL से सवाल किया कि उसने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पहले उसी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया।

इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि देश के कई हाईकोर्ट में इसी तरह के मामले लंबित हैं। यदि अलग-अलग अदालतों में सुनवाई होती रही तो राष्ट्रीय नीति प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी मामलों को एक साथ सुनना जरूरी है।

E20 पेट्रोल को लेकर क्यों है विवाद?

E20 यानी ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है।

कुछ वाहन मालिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • पुराने वाहनों के इंजन पर असर पड़ सकता है।
  • माइलेज कम हो सकता है।
  • इंजन के कुछ रबर और प्लास्टिक पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं।
  • रखरखाव की लागत बढ़ सकती है।

हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जिससे साबित हो कि E20 से बड़े पैमाने पर वाहनों को नुकसान हो रहा है।

सरकार E20 को क्यों बढ़ावा दे रही है?

केंद्र सरकार के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कई बड़े फायदे हैं—

  • कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी।
  • विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • गन्ना और मक्का उगाने वाले किसानों की आय बढ़ेगी।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
  • देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

2030 तक बड़ा लक्ष्य

भारत पिछले वर्ष ही 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर चुका है। अब सरकार ने 2030 तक पेट्रोल में 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में आगे भी सुनवाई होगी। अदालत यह तय करेगी कि इथेनॉल आवंटन से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई किस प्रकार की जाए। वहीं सरकार अगले वर्ष तक E20 के प्रभावों का विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रस्तुत कर सकती है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का वाहनों, ईंधन दक्षता और पर्यावरण पर वास्तविक असर क्या है।

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