Monday, July 6, 2026
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बिहार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

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सम्राट चौधरी सरकार ने खत्म किया विजिलेंस कैडर, अब बिहार पुलिस में होगा समायोजन

पटना:
बिहार में पुलिस प्रशासन को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया गया है। Samrat Choudhary सरकार ने राज्य के विजिलेंस कैडर यानी निगरानी अन्वेषण संवर्ग को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद निगरानी विभाग में कार्यरत डीएसपी, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को बिहार पुलिस सेवा में समायोजित किया जाएगा।

गृह विभाग की ओर से जारी इस आदेश को बिहार पुलिस प्रशासन में बड़े सुधार और संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे पुलिस व्यवस्था में समन्वय बढ़ेगा और प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी।


क्या है सरकार का नया फैसला?

राज्य सरकार के आदेश के अनुसार अब बिहार निगरानी अन्वेषण संवर्ग के तहत कार्यरत अधिकारियों को अलग कैडर में नहीं रखा जाएगा।

फैसले के मुख्य बिंदु:

  • विजिलेंस कैडर पूरी तरह समाप्त किया जाएगा
  • डीएसपी स्तर के अधिकारियों को बिहार पुलिस सेवा में समायोजित माना जाएगा
  • इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी बिहार पुलिस कैडर में शामिल किया जाएगा
  • विशेष रूप से 2014 और 2023 बैच के अधिकारियों पर यह फैसला लागू होगा
  • सेवा अवधि और अनुभव को सुरक्षित रखा जाएगा

सरकार ने साफ किया है कि किसी अधिकारी की नौकरी, वेतन, सेवा अवधि या अनुभव पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।


सीनियरिटी को लेकर बड़ा बदलाव

हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि समायोजन के बाद अधिकारियों की वरीयता सूची यानी सीनियरिटी तय करने में विशेष नियम लागू होगा।

कैसे तय होगी सीनियरिटी?

जो अधिकारी विजिलेंस कैडर से बिहार पुलिस में शामिल होंगे, उन्हें उनके संबंधित बैच के बिहार पुलिस अधिकारियों की सूची में सबसे नीचे स्थान दिया जाएगा।

यानी:

  • पद सुरक्षित रहेगा
  • सेवा निरंतर मानी जाएगी
  • लेकिन सीनियरिटी सूची में अंतिम स्थान मिलेगा

इसी बिंदु को लेकर पुलिस महकमे में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।


आखिर क्यों खत्म किया गया विजिलेंस कैडर?

दरअसल बिहार में निगरानी विभाग लंबे समय से अलग इकाई के रूप में काम करता रहा है।

पहले की व्यवस्था:

  • निगरानी विभाग का अलग प्रशासनिक ढांचा था
  • विभाग के लिए अलग डीजी (महानिदेशक) की व्यवस्था थी
  • यहां नियुक्त पुलिस अधिकारियों को बिहार पुलिस कैडर के बजाय विजिलेंस कैडर दिया जाता था
  • तबादला, पदस्थापन और प्रमोशन की प्रक्रिया अलग होती थी

इसी अलग व्यवस्था के कारण कई बार प्रशासनिक दिक्कतें सामने आती थीं।


सरकार को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था?

सरकारी सूत्रों के अनुसार अलग कैडर होने से कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो रही थीं।

प्रमुख समस्याएं:

  • बिहार पुलिस और निगरानी विभाग के बीच तालमेल की कमी
  • अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग में दिक्कत
  • प्रमोशन प्रक्रिया में विवाद
  • प्रशासनिक समन्वय में बाधा
  • जांच एजेंसियों के बीच कार्य विभाजन में समस्या

सरकार का मानना है कि अब एकीकृत पुलिस ढांचा बनने से इन समस्याओं का समाधान होगा।


पुलिस प्रशासन में क्या होगा असर?

गृह विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इस फैसले से बिहार पुलिस की कार्यक्षमता और प्रशासनिक नियंत्रण दोनों मजबूत होंगे।

संभावित फायदे:

  • बेहतर समन्वय
  • भ्रष्टाचार जांच में तेजी
  • प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सरलता
  • मानव संसाधन प्रबंधन आसान होगा
  • जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निगरानी विभाग और मुख्य पुलिस तंत्र के बीच दूरी कम होगी।


राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज

इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे पुलिस सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विजिलेंस विभाग की स्वतंत्रता पर इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि सरकार का दावा है कि यह निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक सुधार और बेहतर कार्यप्रणाली को ध्यान में रखकर लिया गया है।


आने वाले समय में दिखेगा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में इस फैसले का असर बिहार की पुलिस व्यवस्था, भ्रष्टाचार निगरानी तंत्र और प्रशासनिक कार्यशैली पर साफ दिखाई देगा।

यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो बिहार पुलिस में एकीकृत प्रशासनिक मॉडल को भविष्य में और मजबूत किया जा सकता है।

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