मोकामा | आर्यन सैन्ड्रिल की रिपोर्ट
“छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी… नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी…”
समय के साथ बदलती सोच और आधुनिक जीवनशैली का असर अब छोटे शहरों और कस्बों में भी साफ दिखाई देने लगा है। बिहार के मोकामा में युवाओं और खासकर महिलाओं के बीच फिटनेस, जिम और योग को लेकर तेजी से जागरूकता बढ़ रही है।
एक समय था जब छोटे शहरों में लड़कियों का जिम जाना समाज में अलग नजर से देखा जाता था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज की युवतियां हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और स्वास्थ्य व फिटनेस को लेकर भी बेहद सजग हो गई हैं। यही वजह है कि मोकामा में अब बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां जिम जाकर नियमित व्यायाम कर रही हैं और फिटनेस को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बना रही हैं।
स्थानीय युवा जिम संचालिका अंजलि सिंह का कहना है कि वर्तमान समय की नई पीढ़ी पुरानी सामाजिक वर्जनाओं को पीछे छोड़ते हुए आत्मनिर्भर और जागरूक बन रही है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं केवल घर और परिवार तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने स्वास्थ्य, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को भी मजबूत बनाना चाहती हैं।
अंजलि सिंह बताती हैं कि जिम केवल शरीर बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच का भी केंद्र बन चुका है। नियमित व्यायाम से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि तनाव कम होता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि “स्वस्थ तन और स्वस्थ मन हर इंसान की जरूरत है। जब शरीर फिट रहता है तो मन भी नियंत्रित और सकारात्मक रहता है। यही कारण है कि आज युवा पीढ़ी जिम, योग और व्यायाम की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है।”
आज सरकारी नौकरी, पुलिस, सेना और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में शारीरिक फिटनेस की अहम भूमिका होती है। ऐसे में युवा वर्ग फिट रहने के लिए जिम और योग को प्राथमिकता दे रहा है। खासकर लड़कियां अब आत्मरक्षा, फिटनेस और करियर को ध्यान में रखते हुए नियमित एक्सरसाइज कर रही हैं।
अंजलि सिंह का मानना है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और स्वस्थ राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं का फिट रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि हर युवक और युवती को अपने जीवन में योग, व्यायाम और फिटनेस को शामिल करना चाहिए।
मोकामा जैसे छोटे शहरों में महिलाओं का जिम की ओर बढ़ता रुझान समाज में बदलती सोच, जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर पेश कर रहा है। अब महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने सपनों और स्वास्थ्य दोनों को बराबर महत्व दे रही हैं।
फिटनेस के प्रति यह बढ़ती जागरूकता आने वाले समय में न केवल युवाओं को स्वस्थ बनाएगी, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की नई मिसाल भी कायम करेगी।







