पटना :
बिहार की राजधानी पटना में BPSC शिक्षक भर्ती को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। CPI(M) और जनवादी नौजवान सभा (DYFI) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सीपीआईएम के राज्य सचिव ललन चौधरी और डीवाईएफआई के राज्य अध्यक्ष मनोज कुमार चंद्रवंशी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि 8 मई 2026 को पटना के डाकबंगला चौराहे के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे BPSC अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया।
शिक्षक भर्ती विज्ञापन और उम्र सीमा में छूट की मांग
जानकारी के अनुसार हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं और महिला अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती विज्ञापन जारी करने और उम्र सीमा में छूट की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाल रहे थे।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है और कई उम्मीदवार उम्र सीमा पार करने की कगार पर पहुंच चुके हैं। इसी मांग को लेकर अभ्यर्थी सड़क पर उतरे थे।
“मांग सुनने की बजाय लाठीचार्ज”
सीपीआईएम नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अभ्यर्थियों की बात सुनने की बजाय उन पर लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई में कई छात्र-छात्राएं घायल हुए हैं।
नेताओं के अनुसार प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थी भी शामिल थीं, जिनके साथ भी कथित रूप से धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया गया।
NDA सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सीपीआईएम नेताओं ने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार अब “जनविरोधी एजेंडा” को बलपूर्वक लागू करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में शिक्षा और रोजगार की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितता आम बात बन चुकी है।
“भर्ती आयोग भ्रष्टाचार में डूबे”
बयान में कहा गया कि रोजगार देने वाले आयोग भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से घिरे हुए हैं। अभ्यर्थियों का भविष्य लगातार अनिश्चितता में डाला जा रहा है।
सीपीआईएम ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनकी आवाज दबाने का काम कर रही है।
सरकार से वार्ता की मांग
सीपीआईएम और डीवाईएफआई ने राज्य सरकार से मांग की है कि अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से तत्काल बातचीत की जाए और उनकी मांगों पर उचित निर्णय लिया जाए।
नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग करना पूरी तरह गलत है और इससे युवाओं में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है।
बिहार की राजनीति में बढ़ा मुद्दा
BPSC अभ्यर्थियों पर कार्रवाई का मामला अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं, जबकि छात्र संगठनों ने भी आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं।
अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और अभ्यर्थियों की मांगों पर कोई फैसला लेती है या नहीं।







