साधु के पुत्र सहित तीन शराब कारोबारियों को किया गया जिलाबदर तो दो के मकानों का हुआ अधिहरण,डीएम-एसपी की सख्त कार्रवाई से हड़कंप।

0
216

राजेश सिन्हा की रिपोर्ट
शराब के कारोबारियों पर इस कदर शामत आ गई है कि अब कारोबारियों का जीना दुश्वार हो गया है। जी हां!हम बात कर रहे हैं खगड़िया जिले की, जहां जिलधिकारी जय सिंह तथा लेडी सिंघम के रुप में पुलिस कप्तान की भूमिका निभा रही मीनू कुमारी ने छोटे-मोटे शराब कारोबारी तो क्या रसूखदार धंधेबाजों को भी कानूनी पाठ पढ़ाना शुरु कर दिया है। शुक्रवार को मानसी थाना अंतर्गत चकहुसैनी निवासी कन्हैया कुमार सिंह को जिलाबदर किए जाने की खबर अभी फिजां में तैर ही रही थी कि दो और शराब कारोबारियों के नाम जिलाबदर किए जाने का आदेश मुकर्रर कर दिया गया। पसराहा थाना अंतर्गत महद्दीपुर निवासी अरुण साह के पुत्र राजीव कुमार तथा नगर थाना अंतर्गत साधु यादव के पुत्र संजीव यादव उर्फ चिप्पा को अवैध रुप से शराब की बिक्री किए जाने के आरोप में आगामी छह माह के लिए जिलाबदर किया गया है।
इन दोनों का आगामी तीस जुलाई 2017 से तीस जनवरी 2018 तक खगड़िया राजस्व जिला में प्रवेष वर्जित है। पुलिस कप्तान के प्रस्ताव पर जिलाबदर किए जाने का आदेश जारी करते हुए यह वर्णित कर दिया गया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने पर उक्त अधिनियम की धारा 70 के तहत की जाने वाली कार्रवाई पुलिस अधीक्षक द्वारा सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि इन दोनों शराब कारोबारियों पर भी कई अपराधिक मुकदमें संबंधित थानों में दर्ज है। राजीव कुमार एवं संजीव यादव का आपराधिक इतिहास तो रहा ही है, शराब के अवैध कारोबार में उनकी सक्रियता, गतिशीलता एवं संलिप्ता पाई गई है। जमानत पर रिहा होने के बाद भी उक्त दोनों शराब कारोबारी बेधड़क शराब का संचालित कर रहे थे। पुलिस अधीक्षक मीनू कुमारी के प्रस्ताव के आलोक में जिलाधिकारी जय सिंह ने अपने न्यायालय के द्वारा यह आदेश पारित करते हुए जिलाबदर की सजा सुनाई है। दूसरी ओर बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 के तहत शराब के कारोबार में लिप्त अलौली थाना अंतर्गत पर्री गांव निवासी स्वर्गीय छोटेलाल यादव के पुत्र सुरेद्र यादव तथा पृथ्वी चन्द्र चौधरी के पुत्र शषिभूषण चौधरी के मकानों का अधिहरण कर लिया गया है। अधिहरण बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम की धारा 58(2) के तहत किया गया है। समाहर्त्ता के कोर्ट से पारित आदेश के अनुसार अधिहरण किया जाने वाला घर किसी भी ऋण भार से मुक्त होगा। साथ ही,लोकहित में यह आदेश दिया गया है कि इस अधिनियम की धारा 58(5) के तहत सार्वजनिक नीलामी की कार्रवाई उत्पाद अधीक्षक के देख-रेख में की जायेगी। अधिहरण प्रस्ताव के आलोक में संबंधित पक्ष को विधिवत् सूचना निर्गत कर निर्धारित तिथि पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया था। सुरेन्द्र यादव ने अपने पक्ष में अपने अधिवक्ता के माध्यम से पक्ष रखा। परन्तु उनका कारण पृच्छा अस्वीकृत कर दिया गया जबकि शषिभूषण चौधरी उपस्थित ही नहीं हुए। विदित हो कि दोनों अभियुक्तों के मकान से बड़े पैमाने पर शराब की बरामदगी हुई थी।