समुचित इलाज के अभाव में जख्मी पिता के सामने पुत्र ने तोड़ा दम,आक्रोशित लोगों ने किया बवाल,डीएम ने जांच दल का किया गठन,मीडिया को दिया धन्यवाद।

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कैमूर -नीतीश सरकार स्वास्थ्य महकमे में सुधार के लिए लाख प्रयास कर ले, लेकिन कैमूर जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का मामला बढ़ता ही जा रहा है। कभी मरीजों को स्ट्रेचर नहीं मिलता तो कभी डॉक्टर के नहीं रहने के कारण परिजनों का हंगामा होता है। कभी एंबुलेंस की उपलब्धता नहीं होती तो कभी किसी अन्य बातों को लेकर हंगामा होता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है आये दिन किसी न किसी बात को लेकर हंगामा होना ,अब सदर अस्पताल भभुआ के लिए आम हो गयी है। जबकि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सिविल सर्जनों को यह आदेश दिया था कि अगर किसी की भी मृत्यु होगी तो उसे घर तक पहुंचाने के लिये शव वाहन की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन द्वारा मुफ्त में किया जाएगा। लेकिन नियमों की धज्जियां कैमूर में खुलेआम उड़ाई जा रही है और जिला प्रशासन कान में तेल डालकर सोया है। बताया जाता है कि कैमूर जिले के दुर्गावती थाना क्षेत्र के GT रोड पर मिनी ट्रक और कंटेनर की शनिवार को टक्कर हो गई थी। जिसमें ट्रक चालक बाप और बेटे बुरी तरह घायल हो गए थे। एनएचआई की टीम ने दोनों को प्राथमिक उपचार के लिए अनुमंडल अस्पताल मोहनिया लाया, जहां गंभीर हालत देख चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल भभुआ भेज दिया। वहां भी गंभीर हालत के कारण चिकित्सकों ने दोनों को शनिवार की देर रात बेहतर इलाज के लिए वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन द्वारा एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई । जिससे कि घायल बाप- बेटे वाराणसी भेजा जा सके। घायल पिता-पुत्र की लगातार बिगड़ती हालत को देख लोग स्वास्थ्य विभाग के सभी आला अधिकारियों के यहां गुहार लगाते रहे। लेकिन किसी ने सुधि नहीं ली। अंततः रविवार की शाम 6:30 बजे पिता के सामने घायल बेटे ने दम तोड़ दिया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन शव को उसके घर आगरा ले जाने कि व्यवस्था करने की बात कह गुम हो गए ।पिता उसी इंतजार में पिछले 16 घंटे से अस्पताल के वार्ड में बेटे के शव के पास बैठा है। लेकिन अब तक अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव ले जाने के लिए कोई इंतजाम नहीं की गयी है। यहां तक कि दिन के दस बजे तक पोस्टमार्टम भी शव का नहीं कराया जा सका था। पीड़ित पिता ने बताया कि मेरी आंखों के सामने मेरे बेटे ने दम तोड़ दिया । हम दोनों के अलावा घर में कोई नहीं है ।शव को ले जाने के लिए लोग बोले थे,अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हो पायी है। इससे अच्छा होता कि लोग मुझे भी जहर की सुई दे कर मार डालते । जख्मी ने बताया कि कलकत्ता से ट्रक लेकर गाजियाबाद के शाहदरा जा रहा था। जब इन सारी बातों पर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गयी तो अस्पताल प्रबंधन ने मीडिया से मिलना मुनासिब नहीं समझा। इधर मिल रही जानकारी के अनुसार
सदर अस्पताल भभुआ में एंबुलेंस के अभाव में ड्राइवर बेटे की मौत से संदर्भित मामला सुर्खियों में आने के बाद जिलाधिकारी राजेश्वर प्रसाद सिंह ने संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी ने मीडिया को धन्यवाद देते हुए त्रिस्तरीय जांच टीम का गठन किया और सिविल सर्जन के रवैये पर दु:ख जताया। कहा कि, जो अस्पताल प्रबंधन का काम होना चाहिए था,उसके लिए जिलाधिकारी को फोन करना पड़ रहा है ।इससे बड़ा दुख क्या होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा ।जांच रिपोर्ट जांच टीम द्वारा सौंपते ही तुरंत करवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो ।
रिपोर्ट-मुकुल जायसवाल