विधा का मंदिर बना अखाड़ा,शिक्षकों ने शिक्षक को पीटा,पुलिस कर रही मामले की पड़ताल।

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खगड़िया/ राजेश सिन्हा

खगड़िया जिले के बहुचर्चित शिक्षा मंदिर के रुप में शुमार डीएवी पब्ल्कि स्कूल इन दिनों शिक्षकों के लिए अखाड़ा बनकर रह गया है। ताजा मामला प्रचार्य सहित कुछ अन्य शिक्षकों द्वारा शिक्षक प्रवीण कुमार शर्मा की पिटाई का है। इस संदर्भ में पीड़ित शिक्षक द्वारा स्थानीय चित्रगुप्तनगर थाना में दिए गए आवेदन के आधार पर पुलिस मामले की गहन पड़ताल कर रही है। पीड़ित शिक्षक प्रवीण कुमार शर्मा का कहना है कि मार्च माह में अभिभावकों की बैठक विधालय परिसर में आयोजित की गई थी। लेकिन किसी बात को लेकर एआरडी श्रीमति अंजली मैडम की मौजूदगी में ही जमकर हंगामा हो गया था। इस मामले में उन्हें दोषी ठहराकर अंग्रेजी शिक्षक रंजीत सिंह तथा सहयोगी शिक्षक सुनील कुमार सिंह सुनियोजित योजना तैयार कर मौके की तलाश में थे। सुनियोजित योजना के तहत बीते 12 अप्रैल को प्राचार्य के द्वारा उन्हें शाम लगभग पांच बजे फोनकर विधालय बुलाया गया। पहले से अंग्रेजी शिक्षक रंजीत सिंह तथा सुनील कुमार सिंह मौजूद थे। अभिभावकों की बैठक में हुए हंगामा के लिए दोषी ठहराते हुए रंजीत सिंह उग्र हो गए। सभी उपस्थित शिक्षकों की मंशा भांपकर अभी वह विधालय परिसर से बाहर निकलने का प्रयास कर ही रहे थे कि प्राचार्य के द्वारा उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया और कम्प्यूटर शिक्षक विक्की कुमार के सहयोग से रंजीत सिंह ने उन्हें धून दिया। इस दौरान उनका शर्ट तो फाड़ दिया गया ही, पॉकेट से दस हजार रुपये और गले से सोने का चैन भी छिन लिया गया। पीड़ित शिक्षक का यह भी कहना है कि अगर विधालय के अन्य शिक्षक व कर्मचारी मौका ए वारदात पर पहुंचकर उन्हें नहीं बचाते तो बहुत बड़ी घटना घटित होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता था। श्री प्रवीण का यह दावा है कि विधालय के सीसीटीवी से सत्यता का सामने आना तय है। इधर चित्रगुप्तनगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि दो अलग अलग शिक्षकों द्वारा आपस में मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। दोनों ओर से थाने में आवेदन दिया गया है। पुलिस के द्वारा मामले की गहन पड़ताल की जा रही है। जांचोपरांत दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। बहरहाल सच्चाई क्या है,यह तो अनुसंधान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन यह कहने में शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इधर के दिनों में शिक्षा का मंदिर अखाड़ा बनकर रह गया और स्थानीय लोग विधालय प्रबंधन को कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं।