विधा का मंदिर क्यों बना है अखाड़ा,कौन करेगा शिक्षकों के विवाद का निपटारा।

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गड़िया/ राजेश सिन्हा

स्थानीय चित्रगुप्तनगर थाना अंतर्गत राजेन्द्रनगर स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में कार्यरत शिक्षकों के बीच जारी जंग पर आखिर कब तक विराम लग सकेगा,यह तो स्कूल प्रबंधन ही जाने। लेकिन खगड़िया जिले के बहुचर्चित शिक्षा मंदिर के रुप में शुमार डीएवी पब्ल्कि स्कूल इन दिनों शिक्षकों के लिए अखाड़ा बनकर रह गया है। किसी एक मामले का निपटारा हो भी नहीं पाता है कि कोई दूसरा मामला जुगाली करने लगता है। अन्य मामलों को दरकिनार कर अगर ताजा मामले की बात करें तो प्रचार्य सहित कुछ अन्य शिक्षकों द्वारा शिक्षक प्रवीण कुमार शर्मा की गई पिटाई का मामला गंभीर होता नजर आ रहा है। बात अलग है कि दो अलग अलग शिक्षक गुट अलग अलग दलील देने में लगा है और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी कर दिया गया है।इस संदर्भ में पीड़ित शिक्षक द्वारा स्थानीय चित्रगुप्तनगर थाना को दिए गए आवेदन के आधार पर पुलिस मामले की गहन पड़ताल भी कर रही है और शिक्षाहित में विवाद सुलझाने की अपील भी कर रही है। पीड़ित शिक्षक प्रवीण कुमार शर्मा के द्वारा दिए गए आवेदन में न केवल प्राचार्य सहित कुछ अन्य शिक्षकों के विरुद्ध मारपीट का आरोप लगाया है बल्कि गले से सोने का चेन और पॉकेट से दस हजार रुपये छिन लेने का आरोप भी लगाया जा रहा है। पीड़ित शिक्षक प्रवीण कुमार शर्मा की बातों में कितना दम है,यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा लेकिन पीड़ित शिक्षक श्री प्रवीण का दावा है कि घटना के दिन का अगर सीसीटीवी फुटेज खंगाल लिया जाय तो दूध का दूध और पानी का पानी होना तय है। श्री प्रवीण का कहना है कि मार्च माह में अभिभावकों की बैठक विधालय परिसर में आयोजित की गई थी। अभिभावकों की बैठक में किसी बात को लेकर एआरडी श्रीमति अंजली मैडम की मौजूदगी में ही जमकर हंगामा हो गया था। वह किसी भी कोण से विवाद के लिए जिम्म्वार नहीं हैं बावजूद इसके इस मामले में उन्हें दोषी ठहराकर अंग्रेजी शिक्षक रंजीत सिंह तथा सहयोगी शिक्षक सुनील कुमार सिंह सुनियोजित योजना तैयार कर मौके की तलाश में थे। सुनियोजित योजना के तहत बीते 12 अप्रैल को प्राचार्य के द्वारा उन्हें शाम लगभग पांच बजे फोनकर विधालय बुलाया गया। बातचीत के क्रम में विवाद का मामला उठा। अंग्रेजी शिक्षक रंजीत सिंह तथा उनके भतीजे कम्प्यूटर शिक्षक विक्की कुमार व सुनील कुमार सिंह मौजूद थे। अभिभावकों की बैठक में हुए हंगामा के लिए दोषी ठहराते हुए रंजीत सिंह उग्र हो गए। सभी उपस्थित शिक्षकों की मंशा भांपकर अभी वह विधालय परिसर से बाहर निकलने का प्रयास कर ही रहे थे कि प्राचार्य के द्वारा उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया और कम्प्यूटर शिक्षक विक्की कुमार के सहयोग से रंजीत सिंह ने उन्हें धून दिया। इस दौरान उनका शर्ट तो फाड़ दिया गया ही, पॉकेट से दस हजार रुपये और गले से सोने का चैन भी छिन लिया गया। पीड़ित शिक्षक का यह भी कहना है कि अगर विधालय के अन्य शिक्षक व कर्मचारी मौका ए वारदात पर पहुंचकर उन्हें नहीं बचाते तो बहुत बड़ी घटना घटित होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता था। इधर आरोपी प्राचार्य सहित अन्य आरोपी शिक्षक का कहना है कि शिक्षक प्रवीण विधालय का माहौल खराब करना चाहते हैं। उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। दूसरी तरफ चित्रगुप्तनगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि दो अलग अलग शिक्षकों द्वारा थाने में आवेदन दिया गया है। पुलिस के द्वारा मामले की गहन पड़ताल की जा रही है। जांचोपरांत दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। बहरहाल सच्चाई क्या है,यह तो अनुसंधान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन यह कहने में शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इधर के दिनों में शिक्षा का मंदिर अखाड़ा बनकर रह गया और स्थानीय लोग विधालय प्रबंधन को कोसने से बाज नहीं आ रहे हैं।