नए साल में मोदी सरकार दे सकती है तोहफा, पेट्रोल-डीजल समेत रियल एस्टेट पर लग सकता है जीएसटी

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के द्वारा जीएसटी लगाए जाने के बाद से तमाम घरेलू उपभोग की वस्तुएं इसकी जद में आ चुकी हैं लेकिन आम आदमी की जेब पर सबसे ज्यादा असर डालने वाला पेट्रोल और डीजल अब भी इसकी पहुंच से दूर है और समय समय पर देशवासियों द्वारा इसे जीएसटी के दायरे में लाने की वकालत की जा चुकी है। लेकिन अब उनकी यह मांग पूरी होती दिख रही है। दरअसल केंद्र सरकार जल्द ही पेट्रोल और डीजल समेत रियल एस्टेट सेक्टर को जीएसटी के दायरे में लाने का बड़ा फैसला कर सकती है।

 

बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस बात का संकेत देते हुए शुक्रवार को कहा है कि जो वस्तुए अभी वस्तु और सेवा कर के दायरे से बाहर हैं उन्हें इसकी सीमा में लाने को लेकर जीएसटी काउंसिल की अगले महीने होने वाली बैठक में फैसला लिया जा सकता है।

जीएसटी लगने के बाद दामों में होगा बड़ा अंतर

अभी हमें पेट्रोल लगभग 80 रुपए प्रति लीटर और डीजल लगभग 60 रुपए प्रति लीटर में मिल रहा है और वहीं अगर ये जीएसटी के दायरे में आते हैं तो इसके बाद इनके दामों में लगभग आधे का अंतर हो जाएगा। जीएसटी लगने के बाद पेट्रोल 80 रुपये के बजाय 40 रुपये में मिलने लगेगा और डीजल में भी यही फर्क देखने को मिलेगा। इसके साथ साथ अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर मुंहर लग जाती है तो पूरे देश में इनके रेट एक जैसे ही होंगे। क्योंकि यह राज्यों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है और इसे जीएसटी के दायरे में लाने के लिए सभी राज्यों की सहमति चाहिए होगी।

 

पेट्रोल-डीजल पर वसूला जाता है भारी भरकम उत्पाद शुल्क

इस मामले को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वर्तमान समय में पेट्रोल पर 21.48 रुपये और डीजल पर 17.33 रुपये का केंद्रीय उत्पाद शुल्क डीजल पर देना पड़ता है।

इसके अलावा राज्यों में लगने वाला भारी भरकम वैट भी इसके मूल्य में इजाफा होने का एक बहुत बड़ा कारण है। पीपीएसी के द्वारा दी गई जानकारी में यह बात सामने आई है। उसके अनुसार अभी पेट्रोल पर सबसे ज्यादा वैट 48.98 प्रतिशत महाराष्ट्र में वसूला जाता है। वहीं इसके अलावा आंध्र प्रदेश में भी डीजल पर लगने वाले वैट की दर 31.06 प्रतिशत है।

जानिए अभी कौन सी वस्तुएं हैं जीएसटी के दायरे से दूर

बताते चलें कि अभी पेट्रोल-डीजल समेत स्टांप ड्यूटी, बिजली की सप्लाई और उत्पादन व रियल स्टेट कारोबार जीएसटी के दायरे से दूर है और वस्तु व सेवा कर के लागू होने के बाद से ही इन तमाम वस्तुओं को इसके दायरे में लाने की मांग जोर पकड़ती रही है।